अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने के लिए दो हफ्तों के युद्धविराम का ऐलान किया गया है। इस समझौते में पाकिस्तान की मध्यस्थता ने अहम भूमिका निभाई है जिसके बाद अब शांति की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पहल के लिए पाकिस्तानी नेतृत्व की तारीफ की है और हमलों को रोकने के फैसले को मंजूरी दी है।

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युद्धविराम और बातचीत को लेकर क्या हैं बड़े अपडेट?

अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह युद्धविराम फिलहाल दो हफ्तों के लिए लागू रहेगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने दोनों देशों को शुक्रवार को इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत के लिए न्योता दिया है। ईरान की सुरक्षा परिषद ने इस समझौते को स्वीकार कर लिया है लेकिन उन्होंने स्थाई शांति के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। इस समझौते से जुड़े कुछ मुख्य विवरण नीचे दिए गए हैं:

  • ईरान ने हमलों को पूरी तरह रोकने और नुकसान की भरपाई की गारंटी मांगी है।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की अपीलों को सराहा है।
  • इस्लामाबाद में होने वाली बैठक में भविष्य की शांति योजनाओं पर चर्चा होगी।
  • इसराइल ने स्पष्ट किया है कि यह युद्धविराम लेबनान के क्षेत्र में प्रभावी नहीं होगा।

एक्सपर्ट्स ने पाकिस्तान और चीन के रोल पर क्या कहा?

पूर्व अमेरिकी अधिकारी जोनाथन शांजर ने इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान के इरादों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान पर चीन का काफी कर्ज है और वह चीन के इशारे पर यह सब कर रहा हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बातचीत में चीन ने पर्दे के पीछे से बड़ी भूमिका निभाई है और पाकिस्तान के जरिए ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश की है।

  • आसिम मुनीर
  • मुख्य व्यक्ति भूमिका
    डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति
    पाकिस्तान सेना प्रमुख
    अब्बास अराघची ईरान के विदेश मंत्री
    जोनाथन शांजर पूर्व अमेरिकी विश्लेषक

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को इस बातचीत की प्रक्रिया में काफी देर से शामिल किया गया था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान का अचानक इस तरह सक्रिय होना थोड़ा अजीब है और इसके पीछे चीन का प्रभाव हो सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस्लामाबाद में होने वाली आगामी बैठक पर टिकी हैं।