अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में काफी भारी रकम खर्च हो रही है. अल जज़ीरा और सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान पर बमबारी के पहले चार दिनों में ही 3.7 बिलियन डॉलर का बड़ा अमाउंट खर्च कर दिया है. यह रकम अमेरिका के मौजूदा 2026 के रक्षा बजट में शामिल नहीं थी. अब बजट से बाहर के इस 3.5 बिलियन डॉलर के लिए अमेरिकी संसद से अलग से मंजूरी लेनी पड़ेगी.

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क्या है युद्ध में होने वाले खर्च का हिसाब

युद्ध में मिसाइलों और हथियारों पर सबसे ज्यादा पैसा खर्च हो रहा है. पहले चार दिनों और 10 दिनों के खर्च का आंकड़ा कुछ इस तरह है:

  • कुल खर्च (पहले 4 दिन): 3.7 बिलियन डॉलर (करीब 891.4 मिलियन डॉलर रोजाना).
  • हथियारों पर खर्च: करीब 3.1 बिलियन डॉलर. इसमें 2000 से ज्यादा मिसाइलें दागी गईं. एक टॉमहॉक क्रूज मिसाइल की कीमत करीब 3.6 मिलियन डॉलर है.
  • ऑपरेशनल खर्च: हवाई ऑपरेशंस पर करीब 125 मिलियन डॉलर और नौसेना के ऑपरेशंस पर 65 मिलियन डॉलर खर्च हुए.
  • पहले दिन का खर्च: युद्ध के शुरुआती 24 घंटों में ही लगभग 779 मिलियन डॉलर खर्च हो गए थे.
  • 10 दिन का अनुमान: 10 दिनों में कुल खर्च 10.35 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें नष्ट हुए एयरक्राफ्ट और रडार का 2.55 बिलियन डॉलर का नुकसान भी शामिल है.

समंदर और आम जनजीवन पर क्या पड़ रहा है असर

इस युद्ध का असर सिर्फ सेना तक सीमित नहीं है, बल्कि कमर्शियल रास्तों पर भी पड़ रहा है. Strait of Hormuz में तीन कमर्शियल जहाजों पर हमला हुआ है, जिससे युद्ध शुरू होने से अब तक कुल 14 जहाज प्रभावित हो चुके हैं. अमेरिकी सेना ने बताया है कि उसने ईरान के 16 माइन-लेइंग (समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाने वाले) जहाजों को नष्ट कर दिया है. वहीं, ईरान ने जवाबी कार्रवाई में अमेरिका और इजरायल के बैंकों को निशाना बनाने की बात कही है. आम लोगों को चेतावनी दी गई है कि वे वित्तीय संस्थानों से कम से कम 1 किलोमीटर दूर रहें.

नेताओं और एक्सपर्ट्स का क्या कहना है

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान समंदर से माइन्स हटा ले, वरना उसे ऐसे परिणाम भुगतने होंगे जो पहले कभी नहीं देखे गए. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का कहना है कि ईरान यह युद्ध बुरी तरह हार रहा है. दूसरी तरफ, ईरान के प्रवक्ता ने अमेरिकियों को एक दर्दनाक जवाब देने की चेतावनी दी है. जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे ईरान का डिफेंस सिस्टम कमजोर होगा, अमेरिका महंगी मिसाइलों की जगह सस्ते बम का इस्तेमाल करेगा, जिससे आने वाले दिनों में हथियारों का खर्च कम हो सकता है.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.