अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग के 84वें दिन एक बड़ी राहत की खबर आ रही है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी अधिकारियों के बयानों से लग रहा है कि मामला अब समझौते या फिर से हमले शुरू होने की सीमा पर खड़ा है। इस जंग को रोकने के लिए पाकिस्तान के बड़े अधिकारी लगातार तेहरान का दौरा कर रहे हैं ताकि कोई अस्थाई समझौता हो सके। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी कई मुद्दों पर गहरे मतभेद बने हुए हैं।

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क्या हैं दोनों देशों के बीच बातचीत के मुख्य मुद्दे?

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही इस बातचीत में कुछ बड़े रोड़े अभी भी बने हुए हैं। दोनों देशों के बीच समझौते के रास्ते में मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • Strait of Hormuz का विवाद: ईरान ने यहाँ टोल टैक्स और नाकेबंदी लागू की है, जिसका अमेरिका कड़ा विरोध कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने साफ किया है कि टोल सिस्टम किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा।
  • यूरेनियम का स्टॉक: ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Mojtaba Khamenei ने निर्देश दिया है कि देश का यूरेनियम बाहर नहीं भेजा जाएगा, जबकि राष्ट्रपति Trump इसे हासिल करना चाहते हैं।
  • फ्रीज की गई संपत्ति: ईरान के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने मांग की है कि अमेरिका उसकी रोकी गई संपत्ति को तुरंत रिलीज करे और समुद्री नाकेबंदी को खत्म करे।

समझौता कराने में पाकिस्तान और अन्य देशों का क्या रोल है?

इस जंग को शांत करने के लिए पाकिस्तान बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के गृह मंत्री Mohsin Naqvi इस हफ्ते दूसरी बार तेहरान पहुंचे हैं और वह अमेरिकी संदेशों को ईरान के नेताओं तक पहुंचा रहे हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir भी एक अस्थाई समझौते के लिए तेहरान का दौरा कर रहे हैं। इस बातचीत में सऊदी अरब, चीन, कतर, तुर्की और मिस्र भी पूरा सहयोग दे रहे हैं। सऊदी अरब के विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan ने राष्ट्रपति Trump की कूटनीतिक कोशिशों और पाकिस्तान की मेहनत की तारीफ की है।

जंग के कारण अमेरिका को उठाना पड़ रहा है भारी नुकसान

इस जंग की वजह से अमेरिका को अपनी सैन्य योजनाओं में बड़े बदलाव करने पड़े हैं। अमेरिका ने ईरान के साथ संघर्ष के लिए अपने हथियारों का स्टॉक बचाने के लिए ताइवान को होने वाली 14 अरब डॉलर की हथियारों की सप्लाई को अस्थाई रूप से रोक दिया है। इसके अलावा, इजराइल की रक्षा में अमेरिका ने अपने आधे से ज्यादा THAAD इंटरसेप्टर मिसाइल इस्तेमाल कर डाले हैं। अमेरिका में बढ़ती गैस और ऊर्जा की कीमतों के कारण राष्ट्रपति Trump पर भी घरेलू स्तर पर काफी दबाव बढ़ गया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

यह युद्ध कब शुरू हुआ था और क्या पहले कोई सीजफायर हुआ था?

यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। इसके बाद 8 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक सीजफायर लागू हुआ था, लेकिन अभी तक किसी स्थाई समझौते पर सहमति नहीं बन पाई है।

ईरान का इस पूरी बातचीत पर क्या रुख है?

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा है कि राजनीतिक समाधान के रास्ते खुले हैं लेकिन ईरान दबाव में आत्मसमर्पण नहीं करेगा। ईरान अभी भी अमेरिका की पिछली हरकतों के कारण उस पर गहरा शक कर रहा है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com