अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग को लेकर बड़ी खबर आ रही है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने साफ कहा है कि इस लड़ाई का जारी रहना किसी के भी हित में नहीं है। कुवैत समाचार एजेंसी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस युद्ध से पूरे क्षेत्र में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। 28 मई 2026 को साइप्रस में हुई यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई गई है।

यूरोपीय संघ ने क्यों दी चेतावनी और बातचीत पर क्या कहा?

काजा कल्लास ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को रोकने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर इन्हीं दोनों देशों की है। जब तक दोनों पक्ष संघर्षविराम यानी सीजफायर पर राजी नहीं होते, तब तक शांति की बात आगे नहीं बढ़ सकती। यूरोपीय संघ का मानना है कि इस मामले में खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, जॉर्डन और मिस्र को शामिल करना जरूरी है क्योंकि ये देश ईरान के रवैये को बेहतर तरीके से समझते हैं। इसके साथ ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना बेहद जरूरी है और यूरोपीय संघ का मानना है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए।

ताजा हमलों से बढ़ी मुश्किलें, कुवैत और अमेरिकी एयरबेस बने निशाना

इस बीच जमीनी स्तर पर तनाव और ज्यादा बढ़ गया है क्योंकि अमेरिका ने इस हफ्ते दूसरी बार ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाने की बात कही है। कुवैत से भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें आई हैं, जिसने हालात को और नाजुक बना दिया है। इस बीच अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बातचीत में कुछ प्रगति होने के संकेत दिए हैं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर किसी एक देश का कब्जा नहीं होना चाहिए और ईरान के साथ कोई भी समझौता सऊदी अरब, यूएई और कतर द्वारा अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने से जुड़ा हो सकता है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

यूरोपीय संघ का इस युद्ध को लेकर क्या रुख है?

यूरोपीय संघ शांति बहाल करने और तनाव कम करने के पक्ष में है। संघ का कहना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए और वह दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने में मदद करने के लिए तैयार है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में क्या शर्त रखी है?

ट्रंप ने कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर किसी एक देश का नियंत्रण नहीं होना चाहिए। उन्होंने संभावित ईरान समझौते को खाड़ी देशों (सऊदी अरब, यूएई, कतर) द्वारा अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने से जोड़ा है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.