अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। IMF ने खाड़ी देशों की आर्थिक तरक्की के अनुमान को काफी कम कर दिया है। तेल और गैस के उत्पादन पर असर पड़ने से अब कई देशों की जीडीपी गिरने की आशंका है, जिससे आम लोगों और व्यापार पर असर पड़ेगा।

खाड़ी देशों की आर्थिक ग्रोथ पर क्या असर पड़ा?

IMF ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि युद्ध की वजह से खाड़ी देशों की आर्थिक रफ्तार धीमी हो गई है। कई देशों की अर्थव्यवस्था में गिरावट आने वाली है, जबकि कुछ की ग्रोथ रेट को घटा दिया गया है। इसका मुख्य कारण तेल और गैस के निर्यात में आई कमी है।

देश अनुमानित आर्थिक असर (2026)
Qatar 8.6% की गिरावट
Kuwait 0.6% की गिरावट
Bahrain 0.5% की गिरावट
Saudi Arabia 3.1% ग्रोथ (अनुमान घटाया गया)
UAE 3.1% ग्रोथ (अनुमान घटाया गया)
MENA Region 1.1% ग्रोथ (अनुमान घटाया गया)

एनर्जी सेक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर को कितना नुकसान हुआ?

युद्ध के कारण तेल और गैस की सप्लाई चेन पूरी तरह बिगड़ गई है। कई बड़े प्लांट और रिफाइनरी को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे दुनिया भर में एनर्जी संकट पैदा हो सकता है। IEA के मुताबिक सप्लाई को पूरी तरह ठीक होने में दो साल तक का समय लग सकता है।

  • करीब 72 से 80 एनर्जी फैसिलिटीज पर हमला हुआ है।
  • इनमें से एक तिहाई फैसिलिटीज को बहुत गंभीर नुकसान पहुंचा है।
  • Qatar के Ras Laffan कॉम्प्लेक्स को बड़ा झटका लगा है, जिसे ठीक करने में 3 से 5 साल लग सकते हैं।
  • Strait of Hormuz से होने वाला तेल का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

दुनिया भर में इसका क्या असर होगा?

IMF और IEA के मुताबिक अगर यह युद्ध गर्मियों तक चला तो हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की पूरी तरह नाकाबंदी कर दी है जिससे समुद्री व्यापार रुक गया है। ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान भी 3.3% से घटाकर 3.1% कर दिया गया है। इस समय पाकिस्तान दोनों देशों के बीच शांति बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.