अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर ईरान में 1700 से अधिक ठिकानों पर हमला किया गया है जिसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया गया है। इस कार्रवाई के विरोध में ईरान ने दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति वाले रास्ते हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है। इसके कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है और अमेरिका के बड़े शहरों में युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि तेल की आपूर्ति बाधित होने से महंगाई बढ़ सकती है।

युद्ध का वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर असर

ईरान द्वारा व्यापारिक मार्ग बंद करने के बाद दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा गया है। मार्सक और एमएससी जैसी बड़ी शिपिंग कंपनियों ने इस रास्ते से अपने जहाज भेजना बंद कर दिया है।

  • अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 3.11 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है।
  • ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 80.83 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है जो 6.2 प्रतिशत की बढ़त है।
  • यूरोपीय बाजारों में नेचुरल गैस की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत का उछाल आया है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह रास्ता बंद रहा तो वैश्विक सप्लाई चेन और माल ढुलाई की लागत बढ़ जाएगी।

सैन्य नुकसान और अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई

पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि इस संघर्ष में अब तक 6 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की पुष्टि के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने इस हमले पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि इस युद्ध के लिए कोई ठोस सबूत नहीं दिए गए।

विवरण आधिकारिक आंकड़े और जानकारी
मारे गए अमेरिकी सैनिक 06 (ईरान का दावा 650)
नष्ट हुए लड़ाकू विमान 03 F-15 जेट
अमेरिकी सैन्य अभियान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी
ईरानी ठिकानों पर हमले 1700 से अधिक

राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि यह अभियान चार से पांच सप्ताह तक चल सकता है और उनके पास पर्याप्त हथियार मौजूद हैं। दूसरी ओर न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन डीसी में लोग ट्रंप के शांति के वादे को लेकर सवाल उठा रहे हैं और युद्ध रोकने की मांग कर रहे हैं।