अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच चल रहा बड़ा सैन्य संघर्ष अब थमता हुआ नजर आ रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि इस युद्ध को समाप्त करने की बातचीत में काफी बड़ी प्रगति हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि अगले कुछ ही घंटों के भीतर इस समझौते को लेकर कोई अच्छी खबर सामने आ सकती है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी शांति समझौते के प्रारूप के लगभग तैयार होने का दावा किया था।
शांति समझौते और अमेरिकी दावों में क्या है खास बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 24 मई 2026 को भारत दौरे के दौरान बताया कि यह संभावित समझौता अमेरिका की उन तमाम चिंताओं को दूर करेगा जो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बनी हुई थीं। ईरान ने अमेरिकी और इसराइली हमलों के जवाब में इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को काफी हद तक बंद कर दिया था।
इससे पहले 23 मई 2026 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि शांति को लेकर एक सहमति पत्र (MoU) लगभग तैयार कर लिया गया है। ट्रंप ने इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को यह भरोसा दिलाया है कि अंतिम समझौते के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा और वहां से संवर्धित यूरेनियम को हटा दिया जाएगा। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा था कि शांति समझौते और दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बीच अभी आधा-आधा चांस बना हुआ है।
ईरान का क्या है रुख और बातचीत में कहां फंसा है पेंच
ईरानी मीडिया और अधिकारियों के अनुसार, बातचीत आगे बढ़ने के बावजूद कुछ मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि सहमति पत्र के दो से तीन बिंदुओं पर अभी भी दोनों पक्षों के बीच असहमति है। ईरान का साफ तौर पर कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से ईरान के नियंत्रण में ही रहेगा, जो कि अमेरिकी दावों के विपरीत है।
इसके साथ ही ईरान के एक वरिष्ठ सूत्र ने स्पष्ट किया है कि तेहरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को सौंपने के लिए तैयार नहीं है। ईरान का मानना है कि परमाणु मुद्दा इस प्रारंभिक समझौते का हिस्सा नहीं है और उन्होंने अमेरिका पर अत्यधिक मांगें थोपने का आरोप लगाया है।
वैश्विक नेताओं की प्रतिक्रिया और मध्यस्थता की कोशिशें
इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने 24 मई 2026 को उम्मीद जताई है कि पाकिस्तान इस शांति वार्ता के अगले दौर की मेजबानी कर सकता है। पाकिस्तान इस पूरे मामले में एक मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दूसरी ओर, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने भी इस बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया है और होर्मुज जलमार्ग को दोबारा खोलने तथा ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने की जरूरत पर जोर दिया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने समझौते को लेकर क्या कहा है?
मार्को रुबियो ने 24 मई 2026 को नई दिल्ली में कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए हो रही बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और कुछ ही घंटों में अच्छी खबर आ सकती है।
शांति समझौते पर ईरान का क्या रुख है?
ईरान का कहना है कि सहमति पत्र के दो-तीन बिंदुओं पर अभी मतभेद हैं। वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है और अपना यूरेनियम भंडार सौंपने को तैयार नहीं है।
इस शांति वार्ता में पाकिस्तान की क्या भूमिका है?
पाकिस्तान इस मामले में एक मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने पाकिस्तान में अगले दौर की वार्ता आयोजित होने की उम्मीद जताई है।