मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। अमेरिका का रक्षा विभाग यानी पेंटागन अब ईरान के खिलाफ एक निर्णायक सैन्य कार्रवाई की तैयारी में जुटा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसे एक ‘फाइनल स्ट्राइक’ के रूप में देखा जा रहा है जिसमें भारी बमबारी के साथ जमीनी सेना का भी इस्तेमाल हो सकता है। अगर कूटनीतिक बातचीत सफल नहीं होती है, तो राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इस जंग को और भी आक्रामक मोड़ पर ले जा सकते हैं।
पेंटागन की इस रणनीति में क्या खास है?
पेंटागन ने जो योजना तैयार की है, उसका मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु ठिकानों से यूरेनियम को सुरक्षित करना है। इसके लिए अमेरिकी सेना ईरान के काफी अंदर तक जमीनी ऑपरेशन चला सकती है। इस योजना के कुछ मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- अमेरिका का मुख्य ध्यान खार्ग आइलैंड (Kharg Island) को अपने नियंत्रण में लेने पर है, जो ईरान के तेल व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र है।
- पेंटागन के इस प्लान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले और मिसाइल दागने की बात कही गई है।
- ईरान ने भी अपनी सुरक्षा बढ़ा दी है और खार्ग आइलैंड जैसे इलाकों में बारूदी सुरंगें बिछाना शुरू कर दिया है।
- व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने फिलहाल जमीनी ऑपरेशन को एक संभावित विकल्प के तौर पर रखा है।
अमेरिकी सैनिकों की तैनाती और क्षेत्रीय स्थिति
इस सैन्य अभियान की तैयारी के लिए अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी फौजी ताकत बढ़ा दी है। हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए हैं जिनका विवरण नीचे दिया गया है:
| तैयारी का प्रकार | विवरण |
|---|---|
| सैनिकों की संख्या | करीब 2,000 से 3,000 अतिरिक्त सैनिक तैनात किए गए हैं। |
| प्रमुख सैन्य इकाई | इसमें 82nd Airborne Division और मरीन यूनिट्स शामिल हैं। |
| मध्यस्थ देश | पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र शांति वार्ता कराने की कोशिश में जुटे हैं। |
| इज़राइल का रुख | इज़राइल लगातार ईरान के बुनियादी ढांचों पर हमले कर रहा है। |
ईरान ने फिलहाल अमेरिका के युद्धविराम प्रस्तावों को खारिज कर दिया है और अपनी सैन्य तैयारी तेज कर दी है। हालांकि, ईरान ने सऊदी अरब पर अपने हमले कम कर दिए हैं ताकि इस पूरे विवाद में सीधी सैन्य जवाबी कार्रवाई से बचा जा सके। खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासियों के लिए भी यह स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि युद्ध की स्थिति में उड़ानों और सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है।
