अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच चल रहा 14 दिनों का युद्धविराम अब खत्म होने वाला है, जिससे युद्ध का खतरा बढ़ गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कह दिया है कि अगर बात नहीं बनी तो बमबारी शुरू हो जाएगी। इस बीच समुद्र में जहाजों की नाकाबंदी ने माहौल को और गरमा दिया है।
युद्धविराम और डोनाल्ड ट्रंप की धमकी का क्या मतलब है?
अमेरिका और ईरान के बीच की शांति की समय सीमा बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को खत्म हो रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस समय सीमा को बढ़ाना बहुत मुश्किल है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान उनकी शर्तें नहीं मानता, तो अमेरिकी सेना बमबारी कर सकती है और उनके पुल और पावर प्लांट तबाह कर सकती है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी जब तक कोई नई डील नहीं हो जाती।
ईरान ने अमेरिका की हरकतों पर क्या जवाब दिया है?
ईरान के अधिकारियों ने अमेरिका की धमकियों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि वे धमकियों के साये में बातचीत नहीं करेंगे। ईरान ने अमेरिका पर ‘समुद्री डकैती’ का आरोप लगाया है क्योंकि अमेरिकी नौसेना ने M/V Touska नाम के ईरानी जहाज को जब्त कर लिया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से बिना अनुमति गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है।
तनाव की मुख्य बातें एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| युद्धविराम खत्म होने की तारीख | 22 अप्रैल 2026 |
| अमेरिकी राष्ट्रपति का रुख | समय सीमा बढ़ाने की कम संभावना |
| जब्त जहाज का नाम | M/V Touska |
| प्रस्तावित बातचीत की जगह | इस्लामाबाद, पाकिस्तान |
| ईरान की चेतावनी | होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमला |
| अमेरिकी कार्रवाई | ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी |
| ब्रिटेन का स्टैंड | इसे एक नाजुक राजनयिक क्षण बताया |
