अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि वे या तो समझौते को तुरंत स्वीकार करें या फिर सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहें। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यदि जरूरत पड़ी तो वे बमों के जरिए बातचीत करेंगे। इस बड़े बयान के बाद खाड़ी देशों और पूरे क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है और युद्ध जैसी स्थिति बन रही है।
अमेरिका ने ईरान को क्या धमकी दी है?
10 जून 2026 को अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने साफ किया कि अमेरिकी सेना ईरान के भीतर महत्वपूर्ण ठिकानों पर बड़े हमले की योजना बना रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि ईरान ने समझौते के लिए बहुत लंबा समय ले लिया है और अब उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। अमेरिका की ओर से यह कदम तब उठाया गया है जब 9 जून को ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर को मार गिराया था। इसके जवाब में अमेरिका ने कई हवाई हमले किए हैं और ईरान की हवाई रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया है। इसके साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के सैन्य कार्यक्रम से जुड़े नौ संगठनों पर नए कड़े प्रतिबंध भी लगा दिए हैं।
ईरान ने अमेरिकी धमकियों पर क्या जवाब दिया?
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने अमेरिकी धमकियों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे अमेरिका की हताशा का संकेत बताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि अमेरिकी हमलों में दक्षिण ईरान के दो जलाशयों को निशाना बनाया गया जिससे लगभग 20,000 लोग पीने के पानी से महरूम हो गए हैं। ईरान ने इसे एक युद्ध अपराध करार दिया है। इसके साथ ही ईरान के सैन्य मुख्यालय ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने दोबारा हमले किए तो वे कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर और भी गंभीर हमले करेंगे। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरान के पिछले हमलों को बिना किसी बड़े नुकसान के रोक दिया गया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया विवाद की मुख्य वजह क्या है?
विवाद तब बढ़ा जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर को मार गिराया। इसके बाद अमेरिकी सेना ने जवाबी हमले किए और ईरान को तुरंत नया समझौता स्वीकार करने की चेतावनी दी।
ईरान के जलाशयों पर हमले से क्या नुकसान हुआ है?
ईरानी सरकार के अनुसार, दक्षिणी ईरान में अमेरिकी हवाई हमलों की वजह से दो बड़े पानी के स्रोत नष्ट हो गए हैं, जिससे इलाके के लगभग 20,000 लोगों को पीने के पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
