अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए युद्धविराम को खत्म कर दिया है, जिसके बाद अमेरिका ने ईरान में करीब 100 ठिकानों पर जोरदार हमले किए। इस खबर से पूरी दुनिया में हलचल मच गई है और कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है।
ट्रंप ने क्यों लिया यह फैसला
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कदम तब उठाया जब यह आरोप लगे कि ईरान ने Strait of Hormuz में व्यापारिक जहाजों पर हमला किया है। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के लगभग 100 ठिकानों को निशाना बनाया। ट्रंप ने ईरानी शासन को बेहद बुरा बताया और चेतावनी दी कि आने वाले समय में हमले और बढ़ेंगे। U.S. Central Command (CENTCOM) ने पुष्टि की कि ये हमले ईरान की उस क्षमता को कम करने के लिए किए गए, जिससे वह समुद्री रास्तों को बाधित कर सके। वहीं NATO चीफ Mark Rutte ने अमेरिका के इस जवाब को जरूरी बताया है।
ईरान की प्रतिक्रिया और बढ़ता विवाद
दूसरी तरफ, ईरान के सरकारी मीडिया ने देश के कई हिस्सों में धमाकों की खबर दी है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि वह इसका करारा जवाब देगा और दावा किया है कि उसने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर पलटवार किया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर अप्रैल में हुए समझौते (MOU) को तोड़ने का आरोप लगाया है। अमेरिका ने ईरान को दी गई तेल प्रतिबंधों की छूट को भी वापस ले लिया है।
बर्निए सैंडर्स ने जताया कड़ा विरोध
अमेरिकी सीनेटर Bernie Sanders ने इस युद्ध की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाह जंग से अमेरिका मजबूत नहीं होगा, बल्कि इसमें और ज्यादा जान जाएगी और टैक्स देने वालों का पैसा बर्बाद होगा। सैंडर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका झूठ के आधार पर युद्ध में धकेला जा रहा है। उनका मानना है कि युद्ध की घोषणा करने का अधिकार अमेरिकी कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं।
इस बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों पर भी पड़ने लगा है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम बढ़ गए हैं। सुरक्षा के मद्देनजर NATO देशों ने Strait of Hormuz में माइन्सवीपर जहाज तैनात करने का फैसला किया है।
