अमेरिका, इराक और सीरिया एक पुरानी तेल पाइपलाइन को फिर से शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं. इस पाइपलाइन का नाम Kirkuk-Baniyas है. इसका मुख्य मकसद इराक के तेल को सीधे भूमध्य सागर तक पहुँचाना है ताकि उन्हें Strait of Hormuz के समुद्री रास्ते पर निर्भर न रहना पड़े और ईरान का प्रभाव कम हो सके.
इस बड़े प्रोजेक्ट के बारे में अगले हफ्ते आधिकारिक घोषणा हो सकती है. जब इराक के प्रधानमंत्री Ali al-Zaidi व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से मिलेंगे, तब इस समझौते पर मुहर लग सकती है.
पाइपलाइन का इतिहास और हालत
यह पाइपलाइन लगभग 800 किलोमीटर लंबी है और इसे 1952 में बनाया गया था. एक समय पर इससे हर दिन करीब 3 लाख से 4 लाख बैरल तेल भेजा जाता था. लेकिन 1980 के दशक में इसे बंद कर दिया गया था और 2003 में अमेरिका के इराक हमले के दौरान यह काफी खराब हो गई थी.
विशेषज्ञों का मानना है कि इसे फिर से ठीक करने में करीब 2 से 3 साल का समय लग सकता है. इस मरम्मत या इसे नए सिरे से बनाने में 4.5 अरब डॉलर से ज्यादा का खर्च आने का अनुमान है.
अब तक क्या कदम उठाए गए
- जून 2026: अमेरिका और इराक ने पाइपलाइन को दोबारा शुरू करने के लिए एक संयुक्त बयान जारी किया.
- 29 जून 2026: इराक और सीरिया आधिकारिक तौर पर सहमत हुए. इराक के विदेश मंत्री Fuad Hussein और सीरिया के विदेश मंत्री Asaad Hassan al-Shibani ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए.
- 5 जुलाई 2026: इराक के कैबिनेट ने अमेरिका की कंपनियों Capital TI और Chevron Corp, और कतर की कंपनी UCC के साथ शुरुआती समझौतों को मंजूरी दी ताकि नए रास्तों का मूल्यांकन किया जा सके.
इस प्रोजेक्ट को और आसान बनाने के लिए अमेरिका अब सीरिया को ‘आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों’ की लिस्ट से हटाने की तैयारी कर रहा है. इससे अमेरिकी कंपनियों के लिए वहां निवेश करना और काम करना आसान हो जाएगा. अमेरिका के राजदूत Tom Barrack इस समझौते की बारीकियों पर काम कर रहे हैं.
