ईरान में अमेरिका और इसराइल के हमलों ने भारी तबाही मचाई है। इस हमले में हजारों आम लोगों के घर और स्कूल तबाह हो गए। अब ईरान ने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाते हुए इसे मानवाधिकारों का बड़ा उल्लंघन बताया है। दुनिया भर की संस्थाएं अब इस विवाद पर नजर रखे हुए हैं।

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हमलों में कितना हुआ नुकसान और कौन-कौन प्रभावित हुआ?

Iranian Red Crescent Society (IRCS) के प्रमुख Pir Hossein Kolivand ने बताया कि अमेरिकी और इसराइली हवाई हमलों में 81,365 नागरिक यूनिट्स को भारी नुकसान पहुंचा है। इस तबाही में 498 स्कूल और 275 दवाखाने, स्वास्थ्य और इमरजेंसी सेंटर शामिल हैं। इसके अलावा 17 रेड क्रिसेंट सेंटर और तीन हेलीकॉप्टर भी नष्ट हो गए। रिपोर्ट के मुताबिक इन हमलों में सीधे तौर पर आम नागरिकों और एम्बुलेंस को निशाना बनाया गया।

मानवाधिकारों का उल्लंघन और अधिकारियों के कड़े बयान

IRCS की अंतरराष्ट्रीय और मानवाधिकार मामलों की डिप्टी हेड Razieh Alishvandi ने कहा कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से कानूनी कार्रवाई की मांग की है। वहीं FIDH के अध्यक्ष Alexis Deswaef ने इन हमलों की निंदा करते हुए कहा कि इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता आई है और आम लोगों की जान गई है। इस बीच 3 अप्रैल 2026 को IRGC के नेवल इंटेलिजेंस डिप्टी चीफ Behnam Rezaei की भी हमले में मौत हो गई। UN में ईरान के राजदूत Amir Saeid Iravani ने इस पूरी साजिश को राज्य प्रायोजित आतंकवाद करार दिया है।

UN और दुनिया से ईरान की क्या मांग है?

ईरान ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) और रेड क्रॉस जैसी संस्थाओं से कानूनी कदम उठाने को कहा है। ईरान चाहता है कि UN सुरक्षा परिषद इसराइल को परमाणु अप्रसार संधि (NPT) में शामिल होने के लिए मजबूर करे। साथ ही, यह मांग की गई है कि इसराइल के परमाणु केंद्रों की जांच IAEA द्वारा कराई जाए ताकि अंतरराष्ट्रीय शांति बनी रहे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान पर हुए हमलों में कितना नागरिक नुकसान हुआ?

IRCS के आंकड़ों के अनुसार 81,365 नागरिक यूनिट्स तबाह हुए हैं, जिनमें 498 स्कूल, 275 स्वास्थ्य केंद्र और 17 रेड क्रिसेंट सेंटर शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इस हमले पर क्या प्रतिक्रिया दी?

FIDH और UN के फैक्ट-फाइंडिंग मिशन ने हमलों की निंदा की है और कहा है कि इन सैन्य हमलों से आम नागरिकों को भारी कष्ट झेलना पड़ा है।