अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ युद्ध तेज करते हुए सोमवार 6 अप्रैल 2026 को बड़े हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में तेहरान की मशहूर शरीफ यूनिवर्सिटी और कई रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक इन ताजा हमलों में 34 लोगों की जान जा चुकी है जिसमें 6 बच्चे भी शामिल हैं। दूसरी तरफ ईरान ने भी इजरायल पर मिसाइलें दागकर पलटवार किया है जिससे क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है।

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ईरान में हुए हमलों और नुकसान की पूरी जानकारी

  • हताहतों की संख्या: हमलों में अब तक 34 लोगों की मौत हुई है। तेहरान प्रांत के बहरेस्तान में एक रिहायशी इलाके पर हुए हमले में 13 लोग मारे गए जिनमें 4 लड़कियां और 2 लड़के शामिल थे।
  • निशाने पर आए शहर: तेहरान के अलावा इस्फहान, शिराज, अहवाज़, बंदर अब्बास, करज और कोम जैसे शहरों पर बमबारी की गई है।
  • यूनिवर्सिटी पर हमला: शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी को निशाना बनाने से वहां की इमारतों को काफी नुकसान पहुँचा है और आसपास के इलाकों में गैस की सप्लाई बाधित हो गई है।
  • अधिकारी की मौत: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के खुफिया प्रमुख मेजर जनरल माजिद खदेमी भी इस हमले में मारे गए हैं।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी देशों पर असर

ईरान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह किसी अस्थायी सीज़फायर के बदले हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा नहीं खोलेगा। ईरानी नौसेना ने घोषणा की है कि यह समुद्री रास्ता अब अमेरिका और इजरायल के लिए पहले जैसा नहीं रहेगा। इस तनाव को देखते हुए कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपनी वायु रक्षा प्रणालियों यानी एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया है ताकि ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को रोका जा सके।

संघर्ष विराम और आगे की स्थिति

पक्ष ताजा स्थिति और बयान
ईरान पाकिस्तान के शांति प्रस्ताव पर विचार जारी है लेकिन किसी डेडलाइन को मानने से इनकार किया।
अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 7 अप्रैल तक हॉर्मुज जलमार्ग खोलने की समय सीमा दी है।
इजरायल दावा किया है कि ईरानी यूनिवर्सिटी का इस्तेमाल सैन्य और हथियार विकास के लिए हो रहा था।
पाकिस्तान तत्काल युद्धविराम के लिए अमेरिका और ईरान दोनों के संपर्क में है।

ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके नागरिक ठिकानों या यूनिवर्सिटी को निशाना बनाया गया तो वह भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इजरायली संस्थानों को अपना वैध लक्ष्य मानेगा। फिलहाल इस युद्ध की वजह से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और हवाई उड़ानों पर भी असर पड़ने की संभावना बनी हुई है।