अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रही लड़ाई ने पूरी दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई को हिलाकर रख दिया है। इस तनाव की वजह से समुद्र के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते ‘Strait of Hormuz’ पर खतरा बढ़ गया है, जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतों और उसकी आवाजाही पर बड़ा असर पड़ा है। अब कई देश इस डर से अपने सप्लाई रूट बदल रहे हैं ताकि उन्हें तेल की कमी न हो।

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तेल सप्लाई में आई बड़ी रुकावट

फरवरी और मार्च 2026 में जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले किए, तो ईरान ने जवाबी कार्रवाई में Strait of Hormuz को बंद कर दिया। इस कदम से दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई रुक गई, जो रोजाना करीब 10 मिलियन बैरल होती है। International Energy Agency ने इसे दुनिया के तेल बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी रुकावट बताया। इसके साथ ही कतर की Ras Laffan फैसिलिटी पर ड्रोन हमले से दुनिया की 20% LNG सप्लाई भी बाजार से बाहर हो गई थी।

समझौते की कोशिश और नई तनातनी

अप्रैल 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच एक ceasefire हुआ। इसके बाद 17 जून 2026 को दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने एक समझौते (MOU) पर साइन किए, ताकि 60 दिनों के भीतर इस लड़ाई को पूरी तरह खत्म किया जा सके। इस समझौते के बाद रास्ता दोबारा खुला और अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के तेल निर्यात पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दी।

हालांकि, यह शांति ज्यादा दिन नहीं चली। 27 और 28 जून 2026 को फिर से हमले हुए, जिसमें ईरान ने बहरीन पर ड्रोन हमला किया और अमेरिका ने एक कमर्शियल जहाज पर हुए हमले का जवाब दिया। फिलहाल कतर के दोहा में बातचीत चल रही है, जिसमें कतर और पाकिस्तान बीच-बचाव कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत की प्रगति पर खुशी जताई है, लेकिन ईरान का कहना है कि अभी सीधी बातचीत की कोई योजना नहीं है।

रास्ते के कंट्रोल और फीस पर विवाद

ईरान चाहता है कि Strait of Hormuz पर उसका पूरा अधिकार हो और वह वहां से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट फीस ले। ओमान ने एक बीच का रास्ता निकाला है जिसमें जहाजों को ईरान और ओमान दोनों को सर्विस फीस देनी होगी, लेकिन इस पर अभी सहमति नहीं बनी है। अमेरिका का कहना है कि यह रास्ता पूरी तरह फ्री होना चाहिए। ओमान ने अपने Musandam Peninsula के पास एक नया रास्ता बनाने की घोषणा की है, लेकिन ईरान ने इसे खारिज कर दिया है और जहाजों को चेतावनी दी है कि वे केवल ईरान द्वारा मंजूर रास्तों का ही इस्तेमाल करें।

दुनिया पर असर और डेटा

इस लड़ाई का सबसे बुरा असर एशिया के देशों पर पड़ा, जहाँ तेल और गैस की भारी किल्लत हुई और कीमतें आसमान छूने लगीं। जापान, जो अपना 90% से ज्यादा तेल मिडिल ईस्ट से लेता है, उसने नए रास्ते खोजने की कोशिश की है। दूसरी तरफ, अमेरिका ने अपनी तेल उत्पादन क्षमता बढ़ाकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है ताकि बाजार को संभाला जा सके।

विवरण आंकड़ा/स्थिति
रुकी हुई तेल सप्लाई 10 मिलियन बैरल प्रतिदिन
कुल ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर असर 20%
ग्लोबल LNG सप्लाई में कमी 20%
US तेल उत्पादन (अप्रैल 2026) 13.93 मिलियन बैरल प्रतिदिन
जापान की मिडिल ईस्ट पर निर्भरता 90% से ज्यादा
ब्लॉकेड हटने के बाद ईरान का निर्यात 40 मिलियन बैरल से ज्यादा
US Strategic Petroleum Reserve 40 साल के सबसे निचले स्तर पर

वर्तमान में सारा ध्यान दोहा में हो रही बातचीत पर है, ताकि Strait of Hormuz के भविष्य और वहां से होने वाली तेल सप्लाई पर एक स्थायी फैसला लिया जा सके।