US-Israel और ईरान के बीच बढ़ा तनाव, शिपिंग और जलवायु संकट से दुनिया में मची खलबली

Al Jazeera English ने अपनी हालिया रिपोर्ट में दुनिया के सामने कई गंभीर मुद्दे रखे हैं। इसमें अमेरिका और इसराइल का ईरान के साथ बढ़ता टकराव सबसे अहम है। इसके साथ ही दुनिया के सामने जलवायु परिवर्तन और ऐतिहासिक न्याय जैसी बड़ी चुनौतियां भी खड़ी हैं जो आने वाले समय में बड़ा असर डाल सकती हैं।

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ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जैसी स्थिति क्यों बनी?

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने साफ कहा कि अगर अमेरिका के साथ युद्धविराम खत्म हुआ और कोई समझौता नहीं हुआ, तो ईरान मैदान में नए कदम उठाएगा।

ईरान ने अमेरिका पर अपने वादे तोड़ने, नाकाबंदी करने और धमकियां देने का आरोप लगाया है। हाल ही में अमेरिका ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी जहाज को जब्त किया, जिसकी वजह से पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता रुक गई है। दोनों देशों के बीच फिलहाल एक कमजोर समझौता चल रहा है लेकिन माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।

जलवायु बदलाव और शिपिंग नियमों पर क्या है विवाद?

समुद्र में जहाजों से निकलने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए ‘नेट-जीरो फ्रेमवर्क’ (NZF) पर काम चल रहा है। इसे 2025 में इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के सदस्य देशों ने तय किया था।

प्रशांत द्वीप देशों का कहना है कि कुछ ताकतवर देश इस नियम को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। इन देशों ने चेतावनी दी है कि अगर 2026 तक यह फ्रेमवर्क सही तरीके से लागू नहीं हुआ, तो वे कार्बन डाइऑक्साइड के प्रति टन पर 150 डॉलर का शुल्क लगाने की मांग करेंगे।

पर्यावरण और मीडिया की भूमिका पर क्या अपडेट है?

पर्यावरण की रक्षा के लिए काम करने वाली 6 महिलाओं को 2026 का गोल्डमैन प्राइज दिया गया है। वहीं केन्या में जलवायु परिवर्तन का असर इतना बढ़ा है कि लेक विक्टोरिया के पास महिलाओं ने पुरानी परंपराएं तोड़कर मछली पकड़ना शुरू किया है।

रिपोर्ट में इस बात पर भी चर्चा हुई कि कैसे पश्चिमी मीडिया और बड़े नेता युद्ध की खबरों को अपने तरीके से पेश करते हैं। यह तरीका आम जनता की राय को प्रभावित करता है और सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने का काम करता है।