अमेरिका और इसराइल की ईरान के साथ जंग को चार महीने से ज्यादा हो गए हैं। इस लड़ाई की वजह से पूरी दुनिया के एनर्जी मार्केट में बड़ी उथल-पुथल मची हुई है। तेल की कीमतों में अचानक भारी बढ़ोतरी हुई और सप्लाई के पुराने रास्ते बदल गए, जिससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ा।

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लड़ाई की शुरुआत और रास्तों की बंदी

यह पूरा विवाद 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने 4 मार्च 2026 को Strait of Hormuz को बंद कर दिया। यह रास्ता दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बहुत जरूरी है। इसके अलावा अमेरिका ने 13 अप्रैल से 29 मई 2026 तक ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी भी की थी।

तेल की कीमतों और सप्लाई का हाल

International Energy Agency (IEA) ने इसे इतिहास की सबसे बड़ी सप्लाई रुकावट बताया है। Strait of Hormuz से होने वाला तेल का बहाव 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन से घटकर सिर्फ 27 लाख बैरल रह गया। इस वजह से तेल की कीमतों में जो बदलाव आए, उसकी जानकारी नीचे टेबल में दी गई है:

तारीख/समय तेल का भाव (Brent Crude) / असर
2 मार्च 2026 80 से 82 डॉलर प्रति बैरल
9 मार्च 2026 100 डॉलर से ज्यादा
अप्रैल 2026 (शुरुआत) 144 डॉलर (अब तक का सबसे ज्यादा)
जून 2026 (अंत) लगभग 73 डॉलर
1 जुलाई 2026 73.2 डॉलर
सप्लाई फ्लो 20 मिलियन bpd से घटकर 2.7 मिलियन bpd
GDP असर ग्लोबल GDP ग्रोथ में 0.6% की गिरावट का अनुमान (J.P. Morgan)

शांति की कोशिश और ताज़ा हालात

पाकिस्तान की मदद से अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून 2026 को एक समझौता (MOU) हुआ। इस समझौते के बाद लड़ाई रोकने और Strait of Hormuz को फिर से खोलने की बात हुई, जिससे तेल के दाम गिरकर 73 डॉलर के करीब आ गए।

हालाँकि, 1 जुलाई 2026 तक की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक हालात अब भी पूरी तरह ठीक नहीं हुए हैं। ईरान ने अमेरिकी दूतों से मिलने से मना कर दिया है, क्योंकि रास्ता पूरी तरह खोलने के नियमों पर दोनों देशों में सहमति नहीं बन पा रही है। 26 और 27 जून को हुए कुछ हमलों ने फिर से तनाव बढ़ा दिया है, जिससे बाज़ार में अनिश्चितता बनी हुई है।