अमेरिका के एक वरिष्ठ सीनेटर लिंडसे ग्राहम के एक बयान ने पूरी दुनिया में हलचल तेज कर दी है। उन्होंने इशारा किया है कि ईरान पर हो रहे अमेरिकी और इस्राइली हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान के विशाल तेल भंडार पर नियंत्रण पाना है। 9 मार्च 2026 को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक सीनेटर ने इन हमलों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अब तक का सबसे बेहतरीन निवेश बताया। इस बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और यह 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।

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अमेरिकी सीनेटर ने ईरान के तेल को लेकर क्या कहा?

रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक टीवी इंटरव्यू में साफ कहा कि दुनिया के 31 प्रतिशत तेल भंडार वेनेजुएला और ईरान के पास हैं। उनका मानना है कि अमेरिका और भविष्य की नई ईरानी सरकार इन संसाधनों के साथ एक दूसरे के पार्टनर बन सकते हैं। उन्होंने इस्राइल को यह सलाह भी दी कि वह ईरान के तेल ढांचे को पूरी तरह नष्ट करने से बचे। उनका तर्क है कि ईरान में सत्ता बदलने के बाद वहां के लोगों को अपना देश दोबारा खड़ा करने के लिए इसी तेल अर्थव्यवस्था की जरूरत पड़ेगी। वहीं ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने ग्राहम के इस बयान को दुर्लभ ईमानदारी बताते हुए कहा कि यह युद्ध सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि संसाधनों पर कब्जे के लिए लड़ा जा रहा है।

खाड़ी देशों पर असर और तेल की कीमतों में भारी उछाल

ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे इस युद्ध का सीधा असर खाड़ी देशों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इस्राइल ने पहली बार तेहरान और अल्बोरज प्रांत में तेल के ठिकानों पर सीधे हवाई हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने इस्राइल के साथ-साथ सऊदी अरब और बहरीन को भी निशाना बनाया है। बहरीन की सरकारी तेल कंपनी Bapco ने ड्रोन हमले के बाद अपनी सुविधाओं पर फोर्स मेज्योर लागू कर दिया है।

  • बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर से ऊपर जाकर 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है।
  • ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उनके ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रहे, तो तेल की कीमत 200 डॉलर के पार जा सकती है।
  • सऊदी अरब, इराक और कतर जैसे देशों में भी तेल उत्पादन धीमा हो रहा है, जिसे विश्लेषक तेल सेक्टर की सबसे बड़ी रुकावट मान रहे हैं।

ईरान में नया नेतृत्व और अमेरिका की रणनीति

हालिया हमलों में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के मारे जाने के बाद, 9 मार्च को ईरान ने आधिकारिक तौर पर मोजतबा खामेनेई को अपना नया सर्वोच्च नेता घोषित किया है। अमेरिका में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के नाम से चल रहे इस सैन्य अभियान पर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि इन हमलों का मकसद ईरान के खतरनाक परमाणु कार्यक्रम को रोकना और वहां की सत्ता बदलना है ताकि ईरानी लोगों को आजाद किया जा सके। हालांकि तेल ठिकानों पर इस्राइल के सीधे हमलों से अमेरिकी अधिकारी भी चिंतित हैं क्योंकि इससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।