अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान को एक महीना पूरा हो गया है। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस युद्ध में अब तक ईरान के कई शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेताओं की मौत हो चुकी है। इस संघर्ष की आग अब धीरे-धीरे पूरे मध्य पूर्व में फैल रही है, जिसका सीधा असर सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों पर भी पड़ रहा है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी सुरक्षा की स्थिति काफी गंभीर हो गई है।

ईरान के किन बड़े नेताओं की हुई मौत और क्या है नुकसान?

इस एक महीने के दौरान इजरायल और अमेरिका ने ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान में अब तक 1,900 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है। हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर सहित कई बड़े कमांडर मारे गए हैं। नीचे दी गई तालिका में मारे गए प्रमुख नेताओं की जानकारी दी गई है:

नाम पद तारीख
Ali Khamenei सुप्रीम लीडर 28 फरवरी 2026
Mohammad Pakpour IRGC कमांडर-इन-चीफ 28 फरवरी 2026
Abdul Rahim Musavi चीफ ऑफ स्टाफ 28 फरवरी 2026
Aziz Nerzada रक्षा मंत्री 28 फरवरी 2026
Ali Larijani सुरक्षा परिषद सचिव 17 मार्च 2026
Gholamreza Soleimani Basij फोर्स कमांडर 17 मार्च 2026
Esmail Khatib खुफिया मंत्री 18 मार्च 2026

खाड़ी देशों और प्रवासियों पर क्या हुआ इस युद्ध का असर?

ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और अमेरिका के साथ-साथ उनके सहयोगी खाड़ी देशों पर भी ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इस तनाव के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां के व्यापार पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े हैं:

  • UAE: अबू धाबी में एक मिसाइल के मलबे की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई और तीन लोग घायल हुए हैं।
  • Saudi Arabia: सऊदी के एक एयरबेस पर ईरानी हमले में 12 अमेरिकी सैनिक घायल हुए और विमानों को नुकसान पहुंचा है।
  • Kuwait: कुवैत के मुख्य व्यापारिक बंदरगाह पर ड्रोन हमले से संपत्ति को नुकसान हुआ है।
  • Oman: ओमान के सालालाह पोर्ट पर ड्रोन हमले के बाद बड़ी शिपिंग कंपनी Maersk ने अपना कामकाज रोक दिया है।
  • Hormuz Strait: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दुश्मन देशों के जहाजों के लिए बंद कर दिया है, जिससे समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है।
  • Houthi Rebels: यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल पर मिसाइल दागकर युद्ध में शामिल होने का ऐलान कर दिया है।

फिलहाल पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र इस मामले में मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं ताकि युद्ध को रोका जा सके। अमेरिका ने फिलहाल ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले टाल दिए हैं, लेकिन तनाव अभी भी चरम पर है।