अमेरिका और इसराइल ने ईरान की सरकार बदलने के लिए एक बहुत बड़ा और गुप्त प्लान बनाया था। इस योजना का मकसद पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदिनजाद को फिर से सत्ता में लाना था। यह सब तब हुआ जब ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान के सुप्रीम लीडर अली खमनेई की मौत हुई। अब न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट ने इस पूरी साजिश की पोल खोल दी है।
अमेरिका और इसराइल ने अहमदिनजाद को क्यों चुना?
रिपोर्ट के मुताबिक, इसराइल की खुफिया एजेंसी Mossad ने यह योजना तैयार की थी। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump चाहते थे कि ईरान की कमान किसी ऐसे व्यक्ति के हाथ में हो जो वहीं का हो। अहमदिनजाद पहले राष्ट्रपति रह चुके थे और उस समय ईरान के धार्मिक नेताओं के साथ उनके मतभेद थे, जिसकी वजह से उन्हें नजरबंद रखा गया था। US अधिकारियों को लगा कि अहमदिनजाद ईरान की राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य स्थिति को संभालने में सक्षम होंगे।
यह गुप्त मिशन कैसे नाकाम हुआ?
इस योजना को सफल बनाने के लिए Mossad ने अहमदिनजाद से बातचीत भी की थी। उन्हें उनके घर से छुड़ाने के लिए एक इसराइली हमला किया गया, लेकिन इस हमले में अहमदिनजाद की जान लगभग चली गई थी। चोटिल होने के बाद वह इस पूरे प्लान से पीछे हट गए। इसी बीच, मार्च 2026 में मुजतबा खमनेई को नया सुप्रीम लीडर चुन लिया गया, जिससे यह पूरी कोशिश पूरी तरह नाकाम हो गई।
अभी ईरान और अमेरिका के बीच क्या चल रहा है?
मई 2026 की ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत चल रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जल्द से जल्द शांति समझौता करना चाहते हैं क्योंकि ईरान आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। इस बातचीत में परमाणु केंद्रों, प्रतिबंधों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। हालांकि, ईरान के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध दोबारा शुरू हुआ तो वे नए मोर्चे खोल देंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी क्या था?
यह 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ एक सैन्य अभियान था, जिसके शुरुआती हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खमनेई मारे गए थे।
अहमदिनजाद को सत्ता में लाने की योजना किसने बनाई थी?
यह योजना इसराइल की खुफिया एजेंसी Mossad ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर तैयार की थी ताकि ईरान में शासन बदला जा सके।
