अमेरिका और इसराइल मिलकर ईरान के एनर्जी सेक्टर पर एक बड़े हमले की योजना बना रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में ईरान के पावर प्लांट्स, ऑयल रिफाइनरी और अन्य जरूरी सुविधाओं को निशाना बनाया जा सकता है। यह कार्रवाई इस हफ्ते के आखिर या अगले हफ्ते की शुरुआत में हो सकती है।
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हमले को लेकर क्या है योजना
अमेरिकी अधिकारियों के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि ऑपरेशन को सोमवार की सुबह ग्लोबल मार्केट खुलने से पहले पूरा कर लिया जाए। ऐसा इसलिए सोचा जा रहा है ताकि दुनिया भर में तेल और ऊर्जा की कीमतों पर बुरा असर न पड़े। हालांकि, हमले की अवधि और समय को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अभी तक कोई फाइनल आदेश नहीं दिया है, लेकिन उन्होंने हाल ही में कैंप डेविड में हुई बैठक में कहा कि ईरान को बहुत करारा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने ईरान पर बेईमानी और बदहाली का आरोप लगाया है। पेंटागन का कहना है कि राष्ट्रपति का आदेश मिलते ही वे कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वहीं व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी Carolyn Leavitt ने साफ किया कि अमेरिका इस स्थिति में जीत हासिल करेगा और वे ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे।
इसराइल और अन्य अधिकारियों का रुख
इस पूरे प्लान की जानकारी इसराइल को दी गई है और दोनों देश तालमेल बिठाकर काम कर रहे हैं। हालांकि, एक इसराइली अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उन्हें अभी तक ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य अभियान में शामिल होने का कोई आधिकारिक अनुरोध नहीं मिला है। व्हाइट हाउस के भीतर भी कुछ अधिकारी इस हमले को लेकर आशंकित हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि इससे दुनिया में एनर्जी की कीमतें बढ़ सकती हैं और युद्ध का खर्च बढ़ सकता है। जानकारों का कहना है कि अगर ईरान के एनर्जी सेक्टर को निशाना बनाया जाता है, तो इससे वहां की सैन्य क्षमता और तेहरान में बिजली की सप्लाई पर बुरा असर पड़ सकता है।
