अमेरिका और इसराइल के हमलों और कड़े प्रतिबंधों ने ईरान की कमर तोड़ दी है। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी कर दी है जिससे वहां के मुख्य उद्योग बंद हो गए और व्यापार पूरी तरह ठप हो गया। हालात इतने खराब हैं कि ईरान के राष्ट्रपति ने अब अपने नागरिकों से बिजली की खपत कम करने को कहा है क्योंकि ऊर्जा बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुँचा है।

अमेरिका की नाकाबंदी और आर्थिक दबाव का क्या असर हुआ?

अमेरिका ने 13 अप्रैल 2026 से ईरान पर समुद्री नाकाबंदी लागू की है। अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने बताया कि यह नाकाबंदी अब और ताकतवर हो रही है और जल्द ही एक दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भी वहां पहुंचेगा। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent के अनुसार, इस कार्रवाई से ईरान के वित्तीय तंत्र पर शिकंजा कस गया है। उन्होंने यह भी कहा कि नाकाबंदी की वजह से खार्ग आइलैंड के तेल स्टोरेज जल्द भर जाएंगे, जिससे ईरान के तेल के कुएं बंद करने पड़ेंगे। अमेरिकी नौसेना ने अब तक 37 जहाजों का रास्ता बदला है और ईरान के ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े जहाजों को रोका है। इसके साथ ही चीन की कंपनी Hengli Petrochemical और लगभग 40 शिपिंग फर्मों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।

शांति वार्ता और ईरान की क्या मांग है?

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साफ कहा कि वे धमकियों या नाकाबंदी के दबाव में आकर किसी भी बातचीत में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने मांग की है कि बातचीत शुरू करने के लिए अमेरिका को पहले नाकाबंदी जैसी बाधाएं हटानी होंगी। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi इस समय पाकिस्तान में बातचीत के लिए गए हैं, जिसके बाद वे ओमान और रूस का दौरा करेंगे। हालांकि, शांति की उम्मीदों को झटका तब लगा जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूत Jared Kushner और Steve Witkoff की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी। दूसरी तरफ, इसराइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं।

Sushma Kumari

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