ईरान में जारी जंग का असर अब सीधे तौर पर अस्पतालों और मरीजों पर दिख रहा है. अमेरिका और इसराइल के हमलों ने वहां की स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह तोड़ दिया है. ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक सैकड़ों मेडिकल सेंटर मलबे में बदल गए हैं जिससे आम लोगों के लिए इलाज पाना अब बहुत मुश्किल हो गया है.
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कितने अस्पताल और मेडिकल सेंटर हुए तबाह?
Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में अमेरिका और इसराइल के हमलों ने 240 हेल्थ सुविधाओं को निशाना बनाया है. इसमें लगभग 50 अस्पताल और 50 इमरजेंसी सेंटर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं. World Health Organization (WHO) ने भी इस बात की पुष्टि की है कि ईरान के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर जानबूझकर हमले किए गए हैं.
हमलों का सिलसिला और जान-माल का नुकसान
ये हमले 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए थे और समय के साथ नुकसान बढ़ता गया. इसकी पूरी जानकारी नीचे दी गई है:
- मार्च 2026: शुरुआत में 13 मेडिकल फैसिलिटीज़ और 9 रेड क्रिसेंट सेंटर पर हमला हुआ. मार्च के मध्य तक 153 हेल्थ सेंटर तबाह हो गए.
- हताहत: ईरान के डिप्टी हेल्थ मिनिस्टर Ali Jafarian ने बताया कि इन हमलों में 17 हेल्थ वर्कर मारे गए और 101 घायल हुए.
- अप्रैल 2026: 5 अप्रैल तक सरकार ने 322 मेडिकल सेंटरों के क्षतिग्रस्त होने की बात कही. वहीं 10 अप्रैल तक यह आंकड़ा 316 बड़े केंद्रों तक पहुँच गया जिनमें अस्पताल और इमरजेंसी बेस शामिल थे.
- खास हमला: तेहरान के एक साइकियाट्रिक अस्पताल पर भी हमला हुआ जिससे वह पूरी तरह बेकार हो गया.
सरकारों और एक्सपर्ट्स का इस पर क्या कहना है?
इस विवाद पर दोनों पक्षों की बातें अलग हैं. अमेरिका ने कहा है कि ये हमले UN Charter के तहत आत्मरक्षा के अधिकार के तहत किए गए. वहीं ईरान की सरकार और विदेश मंत्रालय ने इसे मानवीय मूल्यों पर हमला और ‘वॉर क्राइम’ करार दिया है. ईरान के राजदूत Ali Bahreini ने WHO में शिकायत दर्ज कराई है कि जेनेवा कन्वेंशन और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हुआ है. 22 अप्रैल को 100 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कानून एक्सपर्ट्स ने एक खुला पत्र लिखकर कहा कि ये हमले UN चार्टर के खिलाफ हैं.