अमेरिका के न्याय विभाग ने भारतीय अरबपति Gautam Adani और उनके भतीजे Sagar Adani के खिलाफ सभी आपराधिक धोखाधड़ी के आरोपों को स्थायी रूप से हटाने का फैसला किया है। यह बड़ा कदम अडानी ग्रुप द्वारा अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश के वादे के बाद उठाया गया है। इससे सालों से चल रहा वह मामला खत्म हो गया है जिसमें भारत के एक सोलर प्रोजेक्ट में करोड़ों की रिश्वत देने का आरोप था।
अमेरिका ने केस क्यों हटाया और अब आगे क्या होगा?
अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने न्यूयॉर्क की अदालत में एक अर्जी दाखिल की है। विभाग ने कहा कि उन्होंने इस केस की समीक्षा की है और अब अपने विवेक से यह तय किया है कि इन व्यक्तिगत आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामलों पर और संसाधन खर्च नहीं किए जाएंगे। यह मामला ‘with prejudice’ के साथ खारिज किया गया है, जिसका मतलब है कि इस केस को भविष्य में दोबारा नहीं खोला जा सकेगा। हालांकि, इस फैसले पर अंतिम मुहर जज Nicholas Garaufis लगाएंगे।
अडानी के वकील Robert Giuffra ने अमेरिकी अधिकारियों को बताया था कि यह केस काफी कमजोर था क्योंकि इसमें सबूतों और अधिकार क्षेत्र की कमी थी। अडानी ग्रुप ने हमेशा इन आरोपों को निराधार बताया था।
अडानी ग्रुप और अमेरिका के बीच हुए वित्तीय समझौतों की जानकारी
इस मामले को खत्म करने से पहले अडानी ग्रुप ने अमेरिका की अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के साथ कुछ वित्तीय समझौते किए हैं। इसमें सिविल फ्रॉड और प्रतिबंधों के उल्लंघन से जुड़े मामले शामिल थे।
| विवरण | रकम / जानकारी |
|---|---|
| अमेरिका में निवेश का वादा | 10 अरब डॉलर |
| SEC सिविल फ्रॉड समझौता (कुल) | 18 मिलियन डॉलर |
| Gautam Adani का SEC भुगतान | 6 मिलियन डॉलर |
| Sagar Adani का SEC भुगतान | 12 मिलियन डॉलर |
| OFAC ईरान प्रतिबंध समझौता | 275 मिलियन डॉलर |
| केस खारिज करने की तारीख | 18 मई 2026 |
| कोर्ट का नाम | Eastern District of New York |
अडानी एंटरप्राइजेज ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के मामले में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के OFAC को 275 मिलियन डॉलर का भुगतान करके विवाद सुलझा लिया था। वहीं, SEC के साथ हुए समझौते में अडानी परिवार ने बिना किसी गलती को स्वीकार किए जुर्माना भरा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
गौतम अडानी और सागर अडानी पर लगे आरोप क्यों हटाए गए?
अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि वह अब इस मामले में और संसाधन खर्च नहीं करना चाहता। साथ ही, अडानी ग्रुप ने अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है।
क्या यह केस भविष्य में फिर से शुरू किया जा सकता है?
नहीं, क्योंकि न्याय विभाग ने इसे ‘with prejudice’ के साथ खारिज करने की मांग की है, जिससे इस केस को दोबारा खोलने का रास्ता बंद हो जाता है।
