अमेरिका ने ईरान के खिलाफ शुरू किया ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट, ट्रेड करने पर लगेगा 25 प्रतिशत टैरिफ।

अमेरिका की ट्रंप सरकार ने ईरान के खिलाफ एक बहुत बड़ा आर्थिक कदम उठाया है। 24 अगस्त 2026 को आधिकारिक तौर पर 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' नाम से एक नया अभियान शुरू किया गया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने इस पूरी योजना को आर्थिक डी-डे कहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान सरकार की वित्तीय स्थिति को पूरी तरह से तोड़ना है। इस नए कड़े नियम के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार जारी रखेगा, उसे अमेरिका में आने वाले सभी सामानों पर 25% का भारी टैरिफ देना होगा।
अमेरिका के इस बड़े कदम के बाद से खाड़ी देशों और दुनिया भर में हलचल मच गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने हांगकांग, चीन, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE, सिंगापुर और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में 60 से ज्यादा ऐसे लोगों, कंपनियों और जहाजों को काली सूची में डाल दिया है जो नियमों को तोड़कर ईरान की मदद कर रहे थे। इसके अलावा अमेरिकी विदेश विभाग ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के बड़े नेताओं के बारे में जानकारी देने वाले को 10 मिलियन डॉलर तक का इनाम देने की घोषणा की है।
UAE ने उठाया बड़ा कदम और कड़े हुए प्रतिबंध
नए नियमों के अनुसार ईरान के लिए मनी लॉन्ड्रिंग में मदद करने वाले किसी भी संस्थान को अमेरिकी डॉलर सिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा। अमेरिकी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने बताया कि UAE ने अमेरिकी दबाव के कारण ईरान के साथ सभी तरह के व्यापार और वित्तीय लेनदेन को पूरी तरह से बंद कर दिया है। इस नए अभियान में विशेष रूप से डिजिटल एसेट, टेक्नोलॉजी, सोना, विमानन और शिपिंग सेक्टर को निशाना बनाया गया है। इन तमाम प्रतिबंधों के बीच ईरान की मुद्रा की वैल्यू लगातार तेजी से गिरती जा रही है, जिससे आम जनता की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं।
दूसरी ओर ईरानी अधिकारियों ने इन प्रतिबंधों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदानिज़ादेह और केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासर हेम्मती ने कहा कि इन पाबंदियों का उनकी देश की अर्थव्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा। संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास इन नियमों को लागू करने की आर्थिक ताकत नहीं है। वहीं दूसरी ओर सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रजाई ने धमकी दी है कि जो भी देश इस अमेरिकी अभियान में शामिल होगा, फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले तेल के परिवहन को पूरी तरह रोक दिया जाएगा। इस बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस अमेरिकी फैसले का समर्थन किया है, जबकि अटलांटिक काउंसिल ने इसे एक रणनीतिक चेतावनी बताया है।
तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें तेज
इस बढ़ते तनाव के बीच हालात को संभालने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी तेजी से किए जा रहे हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने स्थिति को शांत कराने के लिए 24 अगस्त 2026 को तेहरान का दौरा किया। इसके अगले दिन यानी 25 अगस्त 2026 तक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर हुई बातचीत में काफी प्रगति देखने को मिली। एक ईरानी सांसद ने दावा किया कि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने ईरान को शांति बातचीत फिर से शुरू करने के लिए अमेरिका का एक संदेश पहुंचाया है। इसके अलावा ओमान के विदेश मंत्री भी होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिरता पर चर्चा करने के लिए तेहरान का दौरा करने वाले हैं। इस पूरी जानकारी की अधिक आधिकारिक और विस्तृत पुष्टि के लिए आप White House Official Release पर जा सकते हैं।