अमेरिका ने ईरान के खिलाफ शुरू किया नया अभियान, कड़े प्रतिबंधों से दुनिया में मचा हड़कंप.

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के खिलाफ Operation Economic Outcast नाम से एक नया और बड़ा अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य मकसद ईरान को आर्थिक रूप से पूरी तरह से अलग-थलग करना है। इस नए कदम से दोनों देशों के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत पर भी असर पड़ा है और हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं।
कूटनीतिक बातचीत पर असमंजस
तारीख 25 अगस्त 2026 तक अमेरिकी प्रशासन की तरफ से ईरान के साथ बातचीत को लेकर अलग-अलग बयान सामने आए। एक तरफ जहां व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने साफ किया कि अभी कोई औपचारिक बातचीत नहीं चल रही है, वहीं व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने माना कि पर्दे के पीछे यानी बैकचैनल बातचीत अभी भी जारी है। इससे पहले राष्ट्रपति Donald Trump ने 18 अगस्त 2026 को बयान दिया था कि ऐसी कोई भी चर्चा न तो हो रही है और न ही तय की गई है।
नए प्रतिबंधों का ऐलान
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने 24 अगस्त 2026 को 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' की शुरुआत की घोषणा की। इन नए और कड़े Secondary Sanctions के जरिए ईरान के एविएशन, डिजिटल एसेट्स, सोना, शिपिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर को निशाना बनाया गया है। इन प्रतिबंधों की वजह से लगभग 60 संस्थाओं पर गाज गिरी है, जिन पर परमाणु और मिसाइल तकनीक की अवैध खरीद, साइबर ऑपरेशन और तेल की तस्करी का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा अमेरिका ने ईरान को भुगतान करने वाले लाइसेंस भी रद्द कर दिए हैं और अमेरिकी सांस्कृतिक तथा शैक्षणिक संस्थानों तक ईरान की पहुंच पर रोक लगा दी है।
धमकियों और शांति प्रयासों का दौर
प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान संघर्ष को खत्म करने के लिए कोई समझौता स्वीकार नहीं करता है, तो राष्ट्रपति Donald Trump कड़ी कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तान के इंटीरियर मिनिस्टर Mohsin Naqvi ने आर्मी चीफ फील्ड मार्शल Asim Munir के साथ मिलकर तेहरान में बातचीत के बाद शांति प्रयासों में काफी प्रगति होने की बात कही है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका के 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और इसे बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया है। इसके जवाब में ईरान ने अपना 5-सूत्रीय प्लान सामने रखा है, जिसमें युद्ध हर्जाने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण की मांग की गई है।
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय असर
ईरान के अधिकारियों ने अमेरिका के नए प्रतिबंधों का कड़ा जवाब देने की कसम खाई है। ईरान के इकोनॉमी मिनिस्टर Ali Madanizadeh ने कहा कि उनका देश किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं ब्रिगेडियर जनरल Hossein Mohebbi ने धमकी दी है कि अगर ईरानी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया, तो अमेरिकी हितों और ऊर्जा मार्गों पर भारी प्रहार किया जाएगा। इसके अलावा ईरान के पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नियमों का उल्लंघन करने वाले 45 टैंकरों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। आपको बता दें कि दोनों देशों के बीच हुआ अस्थायी संघर्ष विराम 17 अगस्त 2026 को खत्म हो चुका है और पुराना समझौता भी रद्द घोषित कर दिया गया है।