US ने शुरू किया 'Operation Economic Outcast', ईरान पर लगाया अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक प्रतिबंध

Aanya24 August 20263 min read50 viewsWorld
US ने शुरू किया 'Operation Economic Outcast', ईरान पर लगाया अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक प्रतिबंध

अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोमवार, 24 अगस्त 2026 को आधिकारिक तौर पर 'Operation Economic Outcast' की शुरुआत कर दी है। इस नए और सख्त अभियान का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर ईरान को अलग-थलग करना और उसके वित्तीय रास्तों को पूरी तरह से बंद करना है। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जो भी देश या संस्था तेहरान के साथ व्यापार करेगी, उस पर द्वितीयक प्रतिबंध यानी सेकेंडरी सैंक्शंस लगाए जाएंगे। इस योजना को लेकर ट्रेजरी विभाग ने पहले ही परमाणु, मिसाइल, साइबर और तेल नेटवर्क से जुड़े लगभग 60 संस्थानों, व्यक्तियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं।

कड़े प्रतिबंधों के दायरे में कई सेक्टर

यह पूरा अभियान डिजिटल संपत्ति, सोना, विमानन, तकनीक और नौवहन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सीधे तौर पर निशाना बना रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी प्रतिबंधों की पहुंच से कोई भी संस्था बाहर नहीं है और ईरान के लिए मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों को अमेरिकी डॉलर प्रणाली से बाहर कर दिया जाएगा। हालांकि, कुछ तात्कालिक उपायों के साथ ही नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों को अपनी स्थिति सुधारने के लिए एक निश्चित समय अवधि भी दी जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस पहल को इतिहास का सबसे बड़ा और कुचलने वाला आर्थिक अभियान बताया है। साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि जो भी देश ईरान को आर्थिक मदद या जीवन रेखा देगा, उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। देश के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक दबाव ही प्रशासन का सबसे प्रभावी हथियार बना हुआ है।

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ईरान की मुद्रा में भारी गिरावट और तीखी प्रतिक्रिया

इस बड़े अमेरिकी ऐलान के बाद ईरान में तुरंत असर देखने को मिला, जहां देश की राष्ट्रीय मुद्रा रियाल गिरकर अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। ईरानी नेतृत्व ने इस फैसले पर कड़ी नाराजगी और तेवर दिखाए हैं। नेशनल सिक्योरिटी के प्रमुख मोहसेन रेजाई ने धमकी दी कि यदि यह आर्थिक युद्ध जारी रहा, तो ईरान फारस की खाड़ी से होने वाले तेल के निर्यात को पूरी तरह से रोक देगा और प्रतिबंधों का समर्थन करने वाले किसी भी देश को युद्ध की कार्रवाई के समान माना जाएगा। इसके अलावा, ईरानी उप विदेश मंत्री काजिम घरिबबादी ने इस अभियान की आवश्यकता का मजाक उड़ाया, जबकि राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने समझौता ज्ञापन पर वापस लौटने की बात कही और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने इन प्रतिबंधों को गैरकानूनी आर्थिक युद्ध करार दिया।

क्षेत्रीय असर और वैश्विक प्रतिक्रिया

इस नई रणनीति का मुख्य निशाना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और कमर्शियल लिंक जैसे पेट्रोलियम ट्रांसपोर्ट और फ्री-ट्राद जोन की वित्तीय गतिविधियां हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस हफ्ते के अंत तक एक बड़े वित्तीय संस्थान पर भी प्रतिबंध लगाए जाने की उम्मीद है। चीन, जो ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है, इन प्रतिबंधों की प्रभावशीलता के लिए एक मुख्य परीक्षा बना हुआ है। इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE द्वारा ईरान के साथ सभी प्रकार के व्यापार को बंद किए जाने की खबरें सामने आई हैं, जिसे तेहरान वाशिंगटन के साथ समन्वय मान रहा है। हालांकि, कई विश्लेषकों का मानना है कि पिछले प्रतिबंधों के दौरान भी ईरान ने अपनी ऐतिहासिक लचीलापन दिखाया है, इसलिए इस रणनीति के वास्तविक असर पर अभी भी संदेह बना हुआ है। ओमान और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर आधिकारिक चर्चाएं 25 अगस्त 2026 को भी जारी रहने वाली हैं।

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