अमेरिका के करीब 30 डेमोक्रेटिक सांसदों ने एक बड़ा कदम उठाते हुए विदेश मंत्री Marco Rubio को चिट्ठी लिखी है। इन सांसदों ने मांग की है कि इसराइल के परमाणु हथियारों को लेकर जो गोपनीयता बरती जा रही है, उसे अब खत्म किया जाए। सांसदों का कहना है कि अमेरिका और कांग्रेस को इसराइल की परमाणु क्षमताओं की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।
सांसद आखिर क्या मांग कर रहे हैं और क्यों?
कांग्रेसमैन Joaquin Castro के नेतृत्व में एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ और इल्हान ओमार जैसे सांसदों ने यह मांग रखी है। उनके अनुसार, अमेरिका के सैनिक इस क्षेत्र में तैनात हैं और ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच परमाणु हथियारों की जानकारी होना बहुत ज़रूरी है। सांसदों ने Secretary Rubio से इन बातों पर स्पष्टता मांगी है:
- इसराइल के पास कितने परमाणु वारहेड्स और लॉन्च सिस्टम हैं।
- प्लूटोनियम उत्पादन और यूरेनियम संवर्धन की क्षमता क्या है।
- क्या इसराइल ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर कोई ‘रेड लाइन’ या नियम तय किए हैं।
सांसदों का मानना है कि इसराइल को भी उन्हीं नियमों और पारदर्शिता का पालन करना चाहिए जो अन्य देशों के लिए तय हैं।
इसराइल और अमेरिका के बीच का ‘गुप्त समझौता’ क्या है?
सालों से इसराइल ने ‘परमाणु अस्पष्टता’ की नीति अपनाई है, जिसका मतलब है कि वह न तो परमाणु हथियारों की मौजूदगी को स्वीकार करता है और न ही इससे इनकार करता है। बताया जाता है कि 1969 में राष्ट्रपति निक्सन और प्रधानमंत्री Meir के बीच एक गुप्त समझौता हुआ था। इसके तहत अमेरिका ने तय किया था कि अगर इसराइल चुप रहता है, तो वाशिंगटन उससे परमाणु हथियारों के बारे में कोई सवाल नहीं पूछेगा।
हालांकि, अब कई लोग इस नीति का विरोध कर रहे हैं। Nuclear Threat Initiative जैसी संस्थाओं का अनुमान है कि इसराइल के पास करीब 90 परमाणु वारहेड्स हो सकते हैं। हाल ही में ईरान द्वारा इसराइल की परमाणु सुविधाओं जैसे डिमोना और अराद के पास मिसाइल हमले किए गए थे, जिससे इस मुद्दे पर तनाव और बढ़ गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिकी सांसदों ने Marco Rubio को पत्र क्यों लिखा?
सांसदों ने इसराइल के परमाणु हथियारों की गोपनीयता खत्म करने और उनकी वास्तविक क्षमता की जानकारी देने की मांग की है ताकि मिडिल ईस्ट में परमाणु संतुलन को समझा जा सके।
निक्सन-मेयर परमाणु समझौता क्या था?
यह 1969 का एक गुप्त समझौता था जिसमें अमेरिका ने तय किया था कि वह इसराइल से उसके परमाणु हथियारों के बारे में सवाल नहीं करेगा, बशर्ते इसराइल इस पर चुप्पी बनाए रखे।