अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है जिससे दुनिया भर के बाजारों में हलचल मच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने एक शुरुआती समझौते पर साइन किए हैं। इसके बाद ईरान पर लगी पाबंदियों में ढील दी गई है और Strait of Hormuz को फिर से खोल दिया गया है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति का बयान

अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भरोसा जताया है कि ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं। उन्होंने साफ किया कि इन पाबंदियों को अस्थायी रूप से हटाने के लिए अमेरिकी संसद की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की तरफ से ईरान को एक पैसा भी नहीं दिया जाएगा।

यह राहत पूरी तरह से ईरान के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी। उपराष्ट्रपति Vance के मुताबिक, प्रतिबंधों में छूट तभी मिलेगी जब ईरान अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करेगा और अपने यूरेनियम के भंडार को कम करने के लिए ठोस कदम उठाएगा।

समझौते की मुख्य बातें

इस पूरे समझौते को कराने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने अहम भूमिका निभाई। 14-15 जून को एक समझौते पर डिजिटल साइन हुए थे, जो 18 जून 2026 से पूरी तरह लागू हो गए। इसके तहत अमेरिका ने ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी हटा ली है, जिससे अब तेल के टैंकर Strait of Hormuz से आसानी से गुजर सकेंगे।

समझौते की कुछ अहम शर्तें नीचे दी गई हैं:

  • ईरान को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में अपने यूरेनियम स्टॉक को कम करना होगा।
  • अगले 60 दिनों के भीतर परमाणु बातचीत को फिर से शुरू किया जाएगा।
  • ईरान को अपना तेल खुले बाजार में बेचने की अनुमति दी गई है।

आर्थिक असर और अन्य प्रतिक्रियाएं

इस खबर के बाद ईरान की अर्थव्यवस्था में तेजी देखी गई है। ईरानी मुद्रा Rial की कीमत में सुधार हुआ है और वहां के शेयर बाजार ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। हालांकि, यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख Kaja Kallas ने संकेत दिया है कि EU अभी अपनी पाबंदियां जारी रखेगा।

समझौते से जुड़े कुछ मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

विवरण जानकारी
Strait of Hormuz से तेल की आवाजाही (17 जून) 12.5 मिलियन बैरल से ज्यादा
ईरानी रियाल (Rial) की कीमत में बढ़ोत्तरी 15 प्रतिशत से अधिक
पुनर्निर्माण फंड (Reconstruction Fund) 300 बिलियन डॉलर
बातचीत की समय सीमा (Deadline) 60 दिन

अमेरिका ने यह साफ कर दिया है कि वह 300 बिलियन डॉलर के पुनर्निर्माण फंड में कोई पैसा नहीं देगा। JD Vance ने सुझाव दिया है कि इस फंड का इंतजाम अमीर खाड़ी देश कर सकते हैं। दूसरी तरफ, अमेरिकी सीनेट के कुछ रिपब्लिकन सदस्यों ने इस फैसले की आलोचना की है और इसे ईरान के लिए एक तोहफा बताया है।