अमेरिका ने ईरान से आने वाले कच्चे तेल पर लगी पाबंदियों में 30 दिनों की अस्थायी ढील देने का फैसला किया है। ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने जानकारी दी कि यह कदम US-Israel युद्ध के बीच वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर करने के लिए उठाया गया है। यह छूट केवल उस तेल पर लागू होगी जो पहले से ही समुद्री रास्तों से ट्रांजिट में है और नए ऑर्डर पर यह नियम प्रभावी नहीं होगा।

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इस फैसले से आम आदमी और तेल बाजार पर क्या असर होगा?

अमेरिका के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में तेल की सप्लाई को फिर से सामान्य करना है। US-Israel युद्ध की वजह से Brent Crude की कीमतें लगभग 111 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं, जो सामान्य से 60 फीसदी ज्यादा है। ईरान पर लगी इस पाबंदी के हटने से बाजार में करीब 14 करोड़ बैरल तेल उपलब्ध हो सकेगा। जानकारों का मानना है कि इससे आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लग सकती है और आम आदमी को राहत मिल सकती है।

अमेरिका के इस आदेश की मुख्य बातें और शर्तें

ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent के अनुसार यह फैसला उन चुनौतियों को देखते हुए लिया गया है जो ईरान द्वारा Strait of Hormuz में किए गए हमलों के कारण पैदा हुई हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह राहत सीमित समय के लिए है। इस फैसले से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी नीचे दी गई है:

मुख्य जानकारी विवरण
छूट की अवधि 30 दिन (अस्थायी)
तेल की मात्रा लगभग 140 मिलियन बैरल
लागू होने की शर्त केवल पहले से ट्रांजिट में मौजूद शिपमेंट पर
नए शिपमेंट नए ऑर्डर पर कोई छूट नहीं मिलेगी
आधिकारिक घोषणा 19 मार्च 2026
अन्य राहत रूस के तेल पर भी 60 दिनों की छूट पहले से जारी है

अमेरिका पहले ही अपने स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से 17 करोड़ बैरल से अधिक तेल निकाल चुका है। अब इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग और 400 मिलियन बैरल के अतिरिक्त भंडार के रिलीज होने से बाजार में तेल की कमी दूर होने की उम्मीद है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत जैसे देशों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि तेल की कीमतों का सीधा असर यात्रा और माल ढुलाई के खर्च पर पड़ता है।