ओमान के तट पर अमेरिकी सेना ने एक कमर्शियल तेल टैंकर MT Settebello पर हमला किया है। इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई, जबकि 21 अन्य सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। इस घटना के बाद भारत सरकार ने अमेरिका के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है और राजनयिक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला
यह हमला 9 जून 2026 को ओमान के तट पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz के पास हुआ। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस हमले की पुष्टि की है। अमेरिका का दावा है कि यह जहाज ईरानी तेल ले जा रहा था और उसने समुद्री नाकाबंदी के नियमों का उल्लंघन किया। अमेरिकी सेना के अनुसार, जहाज को कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन जब उसने बात नहीं मानी, तो उसके इंजन रूम पर सटीक मिसाइल से हमला किया गया।
इन भारतीय नाविकों की हुई मौत
हमले के बाद कुछ नाविक लापता थे, जिनकी पहचान 11 जून 2026 को हुई। जान गंवाने वाले भारतीय नाविकों के नाम इस प्रकार हैं:
- पटनला सुरेश: विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश के रहने वाले और जहाज के चीफ इंजीनियर।
- आदित्य शर्मा: डेक कैडेट।
- शिवानंद चौरसिया: देवरिया, उत्तर प्रदेश के रहने वाले और इंजन फिटर।
जहाज पर मौजूद अन्य 21 भारतीय चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय जहाजरानी मंत्री Sarbananda Sonowal ने इस घटना को समुद्री परिवार के लिए एक बड़ी क्षति बताया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बचाए गए चालक दल और मृतकों के शवों को जल्द से जल्द भारत वापस लाया जाए। भारत सरकार ने इस हमले के विरोध में अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स को तलब किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने इस हमले की निंदा की और क्षेत्र में शांति के लिए कूटनीति और बातचीत की अपील की है।
जहाज प्रबंधन कंपनी ने आरोपों को नकारा
दुबई स्थित जहाज प्रबंधन कंपनी IOS Marine FZE ने अमेरिका के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि जहाज का ईरान या ईरानी तेल से कोई संबंध नहीं था और हमले से पहले उन्हें कोई चेतावनी नहीं मिली थी। कंपनी ने इस पूरे मामले की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है। वहीं, Forward Seamen’s Union of India ने इस हमले को बेहद दर्दनाक बताया है और समुद्री रास्तों पर नाविकों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।
