Quincy Institute के उपाध्यक्ष Trita Parsi ने खाड़ी देशों की सुरक्षा को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने बताया कि अमेरिका का पुराना सुरक्षा सिस्टम अब अपने अंतिम चरण में है और वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने अब खाड़ी देशों के लिए सुरक्षा के बजाय असुरक्षा का कारण बन रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के माहौल में खाड़ी के देशों जैसे बहरीन, कुवैत और यूएई पर सीधे तौर पर हमले हुए हैं, जिससे पुराने सुरक्षा समझौतों की पोल खुल गई है।

ℹ: Kuwait पर बड़ा हमला, एयर डिफेंस ने मार गिराए 13 ड्रोन और 2 मिसाइल, ईरान की ओर से दागी गई थी मिसाइलें.

अमेरिकी सुरक्षा पर क्या सवाल उठे हैं?

Trita Parsi के अनुसार अमेरिकी सैन्य ठिकाने अब खाड़ी देशों को सुरक्षा देने के बजाय उन्हें ईरान के हमलों का निशाना बना रहे हैं। ईरान के साथ चल रहे युद्ध के दौरान अमेरिका ने अपने सैनिकों और संसाधनों को जिस तरह इस्तेमाल किया है, उससे उसकी सुरक्षा छतरी पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों का कहना है कि अब खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी क्योंकि अमेरिका के पास अब इतनी क्षमता नहीं बची है कि वह दुनिया भर में अपनी पुरानी भूमिका निभा सके। अमेरिका ने हाल ही में अपने तीसरे विमान वाहक पोत USS George HW Bush को क्षेत्र में भेजा है, लेकिन इससे भी तनाव कम नहीं हुआ है।

खाड़ी देशों पर हमलों और सुरक्षा की ताजा स्थिति

ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर कई जवाबी हमले किए हैं। इन हमलों का असर वहां के आर्थिक हालातों और आम जनजीवन पर पड़ा है। पिछले कुछ समय में हुई सैन्य गतिविधियों का विवरण नीचे दिया गया है:

क्षेत्र/देश प्रमुख घटनाक्रम
Bahrain बहरीन पर 186 मिसाइल और 419 ड्रोन हमले दर्ज किए गए।
Kuwait & Qatar ईरानी हमलों के कारण सुरक्षा अलर्ट जारी हुआ और गैस निर्यात पर असर पड़ा।
Strait of Hormuz जहाजों की आवाजाही में कमी आई और समुद्री इंश्योरेंस की कीमत बढ़ गई।
Saudi & UAE ड्रोन और मिसाइल सुरक्षा के लिए यूक्रेन के साथ नए रक्षा समझौते किए।

बचाव के लिए क्या नए कदम उठाए जा रहे हैं?

खाड़ी देश अब सिर्फ अमेरिका के भरोसे रहने के बजाय नए रक्षा सहयोगियों की तलाश कर रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति Zelensky ने हाल ही में सऊदी अरब, कतर और यूएई के साथ समझौतों पर दस्तखत किए हैं ताकि यूक्रेन के युद्ध के अनुभव का इस्तेमाल ड्रोन हमलों को रोकने में किया जा सके। बहरीन इस समय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभाल रहा है और वह ईरान के खिलाफ कड़े राजनयिक कदम उठाने की कोशिश में जुटा है। जीसीसी प्रमुख ने भी संयुक्त राष्ट्र से मांग की है कि खाड़ी के जलमार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और हमलों को रोका जाए। इस युद्ध की वजह से शेयर बाज़ारों में गिरावट और व्यापार में भारी नुकसान देखने को मिला है।