ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। 24 जुलाई 2026 को अमेरिकी सेना ने M/T Lavine नाम के एक टैंकर को उस समय रोका और उस पर फायरिंग की जब वह ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि टैंकर को कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन लगातार चार बार नियमों का उल्लंघन करने के बाद अमेरिकी बलों को मजबूरन टैंकर के इंजन रूम पर फायरिंग करनी पड़ी।
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नाकेबंदी और बढ़ते तनाव के बीच कार्रवाई
ईरानी बंदरगाहों पर यह नाकेबंदी 13 अप्रैल 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के विफल होने के बाद लागू की गई थी। अमेरिकी सेना के नियमों के मुताबिक, बिना अनुमति के इस इलाके में आने वाले किसी भी जहाज को रोकने या पकड़ने का अधिकार अमेरिकी बलों के पास है। हालांकि, भोजन और दवाओं जैसी मानवीय सहायता वाली चीजों को जांच के बाद जाने की अनुमति दी गई है। राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कर दिया है कि अमेरिका किसी भी संदिग्ध जहाज को नष्ट करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ईरान की चेतावनी और जवाबी कार्रवाई
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि इस घटना के लिए जिम्मेदार देशों को अंजाम भुगतना होगा और ईरान अपनी सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा का अधिकार रखता है। ईरान की Fars न्यूज एजेंसी का दावा है कि इस मिसाइल हमले में 2 क्रू सदस्यों की मौत हुई है और टैंकर का इंजन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। हालांकि, अमेरिकी सेना ने मौतों की खबरों पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
इस तनाव के बीच, ईरान की सेना ने बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले करने का दावा किया है। बहरीन में इस संबंध में आपातकालीन चेतावनी भी जारी की गई है। नाकेबंदी शुरू होने के बाद से यह दूसरा मौका है जब अमेरिकी बलों ने किसी व्यावसायिक जहाज को निष्क्रिय किया है। साथ ही, CENTCOM ने अब तक 12 अन्य जहाजों को रास्ता बदलने के लिए मजबूर किया है और ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार 13वीं रात हमले जारी रखे हैं।
