अमेरिकी सेना ने 15 जुलाई 2026 को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए क्यूराकाओ-झंडा लगे तेल टैंकर M/T Belma पर फायरिंग की है। यह जहाज ईरान के खाड़ी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। US Central Command (CENTCOM) ने बताया कि बार-बार चेतावनी देने के बाद भी जब टैंकर खार्ग द्वीप की तरफ आगे बढ़ा, तो अमेरिकी विमानों ने उस पर हमला करके उसे निष्क्रिय कर दिया।

अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान का रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के आदेश के बाद, 15 जुलाई 2026 को शाम 4 बजे ET से ईरान के सभी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लागू कर दी गई थी। इसके तहत अब किसी भी जहाज का ईरान के बंदरगाहों में आना-जाना बंद है। अमेरिकी नौसेना के एडमिरल Brad Cooper ने स्पष्ट किया कि ईरान की आक्रामक हरकतों का जवाब देने के लिए बल का प्रयोग किया जा रहा है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य आवाजाही जारी रहेगी लेकिन मानवीय सहायता ले जाने वाले जहाजों की कड़ी जांच की जाएगी।

लगातार हो रहे हवाई हमले और स्थिति

अमेरिका ने ईरान में सैन्य ठिकानों पर कई हवाई हमले किए हैं, जिसमें सैन्य बैरक, तटीय सुरक्षा प्रणालियां और ग्रेटर टुनब द्वीप पर स्थित क्रूज मिसाइल साइटों को निशाना बनाया गया है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इन हमलों में 7 सैनिक मारे गए और 260 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा दक्षिणी ईरान में पिछले कुछ दिनों में 30 नागरिकों की मौत की खबर भी है।

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि यदि उनके तेल निर्यात को रोका गया, तो वे पूरे क्षेत्र के ऊर्जा निर्यात को ठप कर देंगे। ईरान ने दावा किया कि उन्होंने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से जवाबी हमला किया, जिन्हें संबंधित देशों की सेनाओं ने बीच रास्ते में ही मार गिराया। ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने साफ कहा कि मौजूदा हालात में युद्धविराम संभव नहीं है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.