अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 मार्च 2026 को ऐलान किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खार्ग (Khark) आइलैंड पर मौजूद सभी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। यह हमला “Operation Epic Fury” के तहत किया गया है जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार इस हमले का मुख्य मकसद ईरान के परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को हमेशा के लिए खत्म करना है। इस हमले के बाद खाड़ी देशों और दुनिया भर के कच्चे तेल के बाजार में भारी हलचल देखने को मिल रही है।

खार्ग आइलैंड पर सिर्फ सैन्य ठिकानों को क्यों बनाया गया निशाना

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि सेना को सिर्फ सैन्य ठिकानों पर हमला करने के सख्त निर्देश दिए गए थे। उन्होंने जानबूझकर खार्ग आइलैंड के तेल ढांचे (oil infrastructure) को नुकसान नहीं पहुंचाया है। अमेरिका ईरान को Strait of Hormuz से अपनी नाकेबंदी हटाने का एक मौका देना चाहता है। खार्ग आइलैंड से ही ईरान का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल दुनिया भर में निर्यात होता है। अमेरिका ने ईरान को खुली चेतावनी दी है कि अगर उसने व्यापारिक जहाजों को रोकना बंद नहीं किया, तो अगली बार तेल की खदानों को निशाना बनाया जाएगा।

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का असर और अमेरिका की तैयारी

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने जानकारी दी है कि इस युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक 15,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं। सेना रोजाना औसतन 1000 ठिकानों को निशाना बना रही है जिससे ईरान की मिसाइल दागने की क्षमता 90 प्रतिशत तक कम हो गई है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर उनके लक्ष्य पूरे नहीं होते हैं, तो आने वाले समय में जमीनी सेना (ground forces) का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और ईरान की प्रतिक्रिया

इस बड़े हमले का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और युद्ध के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude) की कीमत तेजी से बढ़कर 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। दूसरी तरफ ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघर कलीबाफ ने अमेरिका को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि ईरानी द्वीपों पर कब्जा करने की किसी भी कोशिश का कड़ा जवाब दिया जाएगा और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में हमलावरों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.