अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर अमेरिकी ईंधन भरने वाले विमान और जासूसी प्लेन तैनात किए गए हैं। यह कदम ईरान के खिलाफ वॉशिंगटन द्वारा छेड़े गए बड़े हमले के बीच उठाया गया है।
7 जुलाई 2026 को US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर जोरदार हमला किया। अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी तट पर मौजूद 80 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए। यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों पर हुए हालिया हमलों के जवाब में की गई थी।
हवाई हमलों के साथ-साथ अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव भी बढ़ाया है। US ट्रेजरी विभाग ने जनरल लाइसेंस X को खत्म कर दिया है, जिससे ईरान को मिलने वाली तेल निर्यात की अस्थायी छूट अब समाप्त हो गई है। इसके अलावा 8 जुलाई तक मिडिल ईस्ट के समुद्री इलाकों में अमेरिकी नौसेना के 20 से ज्यादा युद्धपोत गश्त कर रहे हैं।
सऊदी न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने अपने ईंधन भरने वाले विमानों को फिर से इसराइल और मिडिल ईस्ट के इलाकों में भेजना शुरू कर दिया है। हालांकि, जून 2026 की खबरों में यह बताया गया था कि इसराइल के बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से करीब 20 से 28 अमेरिकी सैन्य विमान हटा लिए गए थे ताकि नागरिक उड़ानों की भीड़ कम हो सके। वर्तमान में विमानों की वापसी पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने के लिए की गई है।
दूसरी तरफ, यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी (EASA) ने 8 जुलाई को इसराइल और मिडिल ईस्ट के कुछ हिस्सों के लिए हवाई जोखिम स्तर को कम कर दिया है। एजेंसी ने हाई-रिस्क एडवाइजरी को हटाकर अब इसे मीडियम लेवल की श्रेणी में रखा है।
