अमेरिका का खाड़ी देशों में रहना अब चर्चा का विषय बन गया है। कुछ पूर्व अमेरिकी अधिकारी चाहते हैं कि वॉशिंगटन यहाँ से हट जाए और अरब देश खुद ईरान को संभालें। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका सिर्फ इसराइल की मदद के लिए यहाँ टिका है। इस तनाव का असर यहाँ रहने वाले प्रवासियों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

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क्या अमेरिका Gulf देशों से अपनी सेना हटा लेगा?

पूर्व अमेरिकी अधिकारी Joe Kent ने सुझाव दिया है कि वॉशिंगटन को खाड़ी क्षेत्र से बाहर निकल जाना चाहिए। उनका कहना है कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स का पैसा इसराइल के हितों के लिए खर्च नहीं होना चाहिए। Kent के मुताबिक, अमेरिका को इसराइल को चेतावनी देनी चाहिए कि अगर उसने ईरान के खिलाफ हमले बंद नहीं किए, तो उसे समर्थन मिलना बंद हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय देशों को अब खुद ईरान से निपटना चाहिए क्योंकि ईरान से फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं है।

GCC देशों के लिए इसमें क्या जोखिम हैं?

प्रोफेसर Sultan Barakat ने बताया कि अमेरिका की मौजूदगी मुख्य रूप से इसराइल की रक्षा के लिए है। उन्होंने चिंता जताई कि अगर अमेरिका और इसराइल का ईरान के साथ युद्ध होता है, तो GCC देश यानी सऊदी अरब, UAE, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन इसमें बीच में पिस सकते हैं। 28 फरवरी 2026 से कतर, कुवैत, बहरीन और UAE में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं। इसी तनाव के कारण 23 अप्रैल 2026 को अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने नागरिकों को मिडिल ईस्ट छोड़ने की सलाह दी थी।

अमेरिका के असली लक्ष्य और रणनीतियां क्या हैं?

पूर्व CENTCOM कमांडर David H. Petraeus ने ईरान के साथ शांति बातचीत में अमेरिका के मुख्य लक्ष्यों के बारे में बताया। इनमें खाड़ी क्षेत्र में बिना किसी रोक-टोक के आवाजाही और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कम करना शामिल है। प्रोफेसर Barakat का यह भी कहना है कि अमेरिका के रक्षा उद्योग और सैन्य अनुबंधों (contracts) की वजह से वह यहाँ बना हुआ है, जिससे अमेरिका में रोजगार बढ़ते हैं और खाड़ी देश समर्थन पाने के लिए ये समझौते करते हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या अमेरिका ने अपने नागरिकों को मिडिल ईस्ट छोड़ने को कहा है?

हाँ, 23 अप्रैल 2026 को अमेरिकी विदेश विभाग ने नागरिकों को मिडिल ईस्ट छोड़ने की सलाह दी थी, जिससे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।

खाड़ी देशों के अमेरिकी ठिकानों पर क्या हुआ है?

28 फरवरी 2026 से कतर, कुवैत, बहरीन और UAE स्थित अमेरिकी बेस पर ड्रोन और मिसाइल हमले हुए हैं, जिससे वहां सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है।