अमेरिकी सेना ने ईरान के काफी अंदर मौजूद अंडरग्राउंड सैन्य ठिकानों पर बड़ा हमला किया है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने ईरान की ताकत को कम करने के लिए सटीक मार करने वाले गोला-बारूद का इस्तेमाल किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस कार्रवाई को लेकर कहा है कि वह इस काम को पूरा कर रहे हैं और यह युद्ध अगले दो से तीन हफ्तों में खत्म हो सकता है। व्हाइट हाउस की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि अमेरिकी सेना ईरान के किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अमेरिकी सरकार और सेना की तरफ से क्या जानकारी दी गई?

  • राष्ट्रपति Donald Trump ने Isfahan के पास हुए हमले को काफी सफल बताया और कहा कि वे ईरान के सैन्य ढांचे को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं।
  • अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि यह ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने का सबसे सही मौका है और इसके लिए उनकी अंडरग्राउंड सुविधाओं को निशाना बनाना जरूरी है।
  • Joint Chiefs of Staff के जनरल Dan Caine ने पुष्टि की है कि ईरान के ऊपर B-52 बमवर्षक विमानों ने उड़ान भरनी शुरू कर दी है।
  • अमेरिकी सेना का मुख्य लक्ष्य ईरान की मिसाइल, ड्रोन और नौसेना के जहाजों को बनाने वाली सप्लाई चेन को पूरी तरह से नष्ट करना है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई और जमीनी हालात क्या हैं?

ईरान के IRGC ने चेतावनी दी है कि वे मिडिल ईस्ट में काम कर रही 18 अमेरिकी तकनीकी और वित्तीय कंपनियों को निशाना बनाएंगे। उन्होंने इन कंपनियों में काम करने वाले लोगों को दफ्तर छोड़ने और आसपास के रहने वालों को सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए कहा है। इसी बीच तेहरान में एक दवा फैक्ट्री पर भी हमले की खबर आई है जिसे लेकर इजरायल का दावा है कि वहां रसायनिक हथियार बनाए जा रहे थे। इसके अलावा कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी एक ईरानी ड्रोन हमला हुआ है जिससे वहां के ईंधन टैंकों में आग लग गई है।

स्थान प्रभाव और घटना
Tehran उत्तर, पूर्व और मध्य इलाकों में जोरदार धमाके
Kuwait Airport ईरानी ड्रोन से तेल टैंक में लगी आग
Qeshm Island पानी को साफ करने वाला प्लांट बंद हुआ
Bandar Abbas ईरान के बंदरगाह पर अमेरिकी और इजरायली हमला
Lebanon झड़प में 4 इजरायली सैनिक और 3 UN शांतिदूतों की मौत

इजरायली वायु सेना ने यह भी जानकारी दी है कि इस युद्ध की शुरुआत से अब तक उन्होंने ईरान के 4000 अलग-अलग ठिकानों पर 16,000 से ज्यादा बम गिराए हैं। इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, परमाणु ठिकाने और मिसाइल लॉन्च करने वाली जगहों को निशाना बनाया गया है। ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका के साथ संदेशों के आदान-प्रदान की बात तो मानी है लेकिन किसी भी सीधी बातचीत से साफ इनकार किया है।