अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के कोम प्रांत में एक बड़े हमले की पुष्टि की है। इस हमले में एक टर्बाइन इंजन बनाने वाली फैक्ट्री को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस जगह का इस्तेमाल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ड्रोन और विमानों के पुर्जे बनाने के लिए किया जाता था। अमेरिका ने इस कार्रवाई के सबूत के तौर पर हमले से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरें भी जारी की हैं।

अमेरिकी हमले में क्या नुकसान हुआ और क्यों की गई कार्रवाई?

अमेरिकी सेना ने 23 मार्च 2026 को इस हमले की आधिकारिक जानकारी साझा की है। हमले के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

  • यह हमला 6 मार्च से 9 मार्च 2026 के बीच किया गया था।
  • निशाना बनाया गया प्लांट हमलावर ड्रोन के लिए गैस टर्बाइन इंजन तैयार करता था।
  • सैटेलाइट तस्वीरों में फैक्ट्री की इमारतों को भारी नुकसान पहुँचने की पुष्टि हुई है।
  • पेंटागन का कहना है कि यह हमला अमेरिकी सेना और क्षेत्रीय सहयोगियों पर बढ़ते खतरे को कम करने के लिए जरूरी था।
  • अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि ईरान की मिसाइल बनाने की क्षमता में अब कमी आई है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई और क्षेत्र में बढ़ता खतरा

इस हमले के बाद ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है और कई जगहों पर जवाबी मिसाइल हमले किए हैं। क्षेत्र की स्थिति को समझने के लिए इन बातों पर गौर करना जरूरी है:

ईरान की कार्रवाई ईरान ने इजरायल और सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी एयर बेस पर मिसाइलें दागने का दावा किया।
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके पावर प्लांट पर हमला हुआ तो वह इस समुद्री रास्ते को बंद कर देगा।
इजरायल के हमले इजरायली सेना ने भी तेहरान में हथियारों की फैक्ट्रियों और खुफिया ठिकानों पर हमले किए हैं।
सऊदी की सुरक्षा फ्रांस ने सऊदी अरब की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने का भरोसा दिया है।

ईरान के संसद अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचाया गया, तो क्षेत्र के अन्य महत्वपूर्ण ठिकाने भी उनके निशाने पर होंगे। फिलहाल इस इलाके में तनाव चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति की अपील कर रहा है।