अमेरिका ने ईरान के हमलों से इसराइल को बचाने के लिए अपनी आधी से ज्यादा मिसाइलों का स्टॉक खत्म कर दिया है. वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध में अमेरिका ने इतनी मिसाइलें दागीं कि अब उसकी अपनी सुरक्षा और दूसरे देशों की मदद करने की क्षमता पर बड़ा असर पड़ सकता है. इस स्थिति के बाद अब अमेरिका के सहयोगी देश भी अपनी सुरक्षा को लेकर डर रहे हैं.

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मिसाइलों का कितना नुकसान हुआ और कौन सी मिसाइलें इस्तेमाल हुईं?

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के हमलों को रोकने के लिए 200 से ज्यादा THAAD इंटरसेप्टर और 100 से ज्यादा Standard Missile-3 और Standard Missile-6 का इस्तेमाल किया. CSIS की एक रिपोर्ट में बताया गया कि इस संघर्ष के दौरान अमेरिका ने अपने पैट्रियट मिसाइलों का करीब 45% और THAAD मिसाइलों का 53% से ज्यादा हिस्सा खर्च कर दिया. विशेषज्ञों का कहना है कि इन मिसाइलों के स्टॉक को दोबारा भरने में 4 साल तक का समय लग सकता है.

स्टॉक की कमी को दूर करने के लिए अमेरिका क्या कदम उठा रहा है?

मिसाइलों की भारी कमी को देखते हुए Lockheed Martin कंपनी ने अलबामा के ट्रॉय में 87,000 स्क्वायर फीट का एक नया म्यूनिशन्स प्लांट खोलने का ऐलान किया है. यह प्लांट THAAD और अगली पीढ़ी के इंटरसेप्टर्स (NGI) के उत्पादन को तेज करेगा. अमेरिकी सरकार 2030 तक 9 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश करेगी ताकि 20 से ज्यादा सुविधाओं को अपग्रेड किया जा सके और मिसाइलों की कमी को जल्दी पूरा किया जा सके.

पेंटागन और सहयोगियों की इस पर क्या राय है?

पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान अमेरिका और इसराइल दोनों ने रक्षा का बोझ बराबर बांटा. वहीं, इसराइल के दूतावास ने भी दोनों देशों के बीच गहरे समन्वय की बात कही. लेकिन स्टिमसन सेंटर की केली ग्रीको जैसी विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ने इसराइल की तुलना में ज्यादा मिसाइलें खर्च कीं. इस वजह से जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश चिंतित हैं क्योंकि वे अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर रहते हैं.

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका ने इसराइल की रक्षा में कितनी मिसाइलें खर्च कीं?

अमेरिका ने 200 से ज्यादा THAAD और 100 से ज्यादा Standard Missile-3 और SM-6 इंटरसेप्टर दागे, जिससे उसका लगभग आधा स्टॉक खत्म हो गया.

मिसाइलों की कमी से अन्य देशों पर क्या असर पड़ेगा?

जापान और दक्षिण कोरिया जैसे सहयोगी देश चिंतित हैं क्योंकि अमेरिका के पास अब सीमित मिसाइलें बची हैं और उन्हें दोबारा बनाने में 4 साल तक का समय लग सकता है.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.