ईरान के खिलाफ चलाए गए ‘Operation Epic Fury’ ने अमेरिका की नींद उड़ा दी है। इस युद्ध में अमेरिका ने इतनी मिसाइलें और हथियार खर्च कर दिए हैं कि अब चीन जैसी बड़ी ताकत से निपटने की चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर दिन भारी रकम खर्च करने के बाद भी अमेरिका अब अपनी सैन्य ताकत की कमी महसूस कर रहा है।

Operation Epic Fury क्या था और इसमें क्या हुआ?

यह सैन्य अभियान 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जिसमें अमेरिका और इसराइल की सेनाओं ने मिलकर ईरान के सुरक्षा तंत्र को तबाह करने के लिए हमले किए। इसका मुख्य मकसद ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों, ड्रोन क्षमताओं और उसकी नौसेना को खत्म करना था ताकि वह अपनी ताकत का प्रदर्शन न कर सके। Admiral Brad Cooper ने बताया कि इस ऑपरेशन में 50,000 से ज्यादा सैनिक, 200 फाइटर जेट और दो एयरक्राफ्ट करियर शामिल थे, जिन्होंने 100 घंटे से भी कम समय में करीब 2,000 ठिकानों पर हमला किया। यह लड़ाई 8 अप्रैल 2026 को ceasefire के साथ समाप्त हुई।

मिसाइलों की कमी से अमेरिका क्यों डरा हुआ है?

US Indo-Pacific Command के कमांडर Admiral Samuel J Paparo ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया कि उनके पास मिसाइलों का स्टॉक सीमित है। Center for Strategic and International Studies (CSIS) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध के कारण अमेरिका के एयर डिफेंस मिसाइलों का स्टॉक खतरनाक स्तर तक कम हो गया है। अमेरिका ने अपने Patriot मिसाइलों का लगभग आधा हिस्सा और THAAD इंटरसेप्टर का आधे से ज्यादा स्टॉक खर्च कर दिया है। इसके अलावा SM-3, SM-6, Tomahawk और JASSM जैसी जरूरी मिसाइलें भी काफी कम हो गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्टॉक को फिर से भरने में 1 से 4 साल का समय लग सकता है, जिससे ताइवान जैसे मुद्दे पर चीन के खिलाफ अमेरिका की स्थिति कमजोर हो सकती है।

ईरान युद्ध में अमेरिका ने कितने पैसे खर्च किए?

इस युद्ध की लागत इतनी ज्यादा थी कि इसने अमेरिका के बजट को हिला कर रख दिया। Iran War Cost Tracker और अन्य विशेषज्ञों ने इस खर्च का जो हिसाब दिया है, वह नीचे दी गई टेबल में देखा जा सकता है:

विवरण अनुमानित लागत
औसत दैनिक खर्च 1 अरब डॉलर
55 दिनों का कुल खर्च 61 अरब डॉलर से ज्यादा
Linda Bilmes का दैनिक अनुमान 2 अरब डॉलर
कुल अनुमानित खर्च (Projected) 1 ट्रिलियन डॉलर
शुरुआती दिनों का खर्च (Pentagon) 11.3 अरब डॉलर
शुरुआती दिनों का खर्च (Linda Bilmes) 16 अरब डॉलर

इतना खर्च करने के बाद भी चिंता यह है कि चीन इस मौके का फायदा उठा सकता है। ऐसी खबरें भी आई हैं कि चीन, ईरान को उसके एयर-डिफेंस सिस्टम को फिर से बनाने में मदद कर रहा है, जिससे भविष्य में अमेरिका और इसराइल के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।