US Missile Update: ईरान के साथ जंग में अमेरिका की मिसाइलें हुईं खत्म, आधे से ज्यादा स्टॉक इस्तेमाल, अब चीन से बढ़ा खतरा
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग जिसे ‘Operation Epic Fury’ कहा जा रहा है, उसने अमेरिकी सेना के हथियारों के भंडार को काफी कम कर दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका ने अपनी सबसे ताकतवर मिसाइलों का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है. अब पेंटागन को अपनी इस कमी को पूरा करने के लिए भारी बजट की जरूरत पड़ रही है.
अमेरिका की किन मिसाइलों का कितना स्टॉक खत्म हुआ है?
पेंटागन की गुप्त रिपोर्ट और विशेषज्ञों के विश्लेषण से पता चला है कि अमेरिका के डिफेंस सिस्टम अब कमजोर पड़ रहे हैं. युद्ध के दौरान मिसाइलों के इस्तेमाल की पूरी जानकारी नीचे दी गई तालिका में है:
| मिसाइल का नाम | कितना स्टॉक इस्तेमाल हुआ |
|---|---|
| Patriot Missiles | लगभग 50% |
| THAAD Interceptors | 50% से ज्यादा |
| Precision Strike Missiles (PrSM) | 45% से ज्यादा |
| Tomahawk Missiles | लगभग 30% |
| JASSM | 20% से ज्यादा |
| SM-3 और SM-6 | लगभग 20% |
ट्रंप का फैसला और ईरान की प्रतिक्रिया क्या है?
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ युद्धविराम (Ceasefire) को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है, लेकिन उन्होंने ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी जारी रखी है. दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने इस युद्धविराम को मानने से इनकार कर दिया है. ईरान ने साफ कहा है कि अमेरिका की समुद्री नाकाबंदी युद्ध की तरह है और वह अपने राष्ट्रीय हित में कदम उठाएगा.
इसी बीच, अमेरिकी खजाना विभाग ने उन 14 लोगों और संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाए हैं जो ईरान को हथियार जुटाने में मदद कर रहे थे. अमेरिकी सेना अब अपनी कमी को पूरा करने के लिए साल 2027 के बजट में 30 अरब डॉलर से ज्यादा की मांग कर रही है.
क्या अब चीन के खिलाफ अमेरिका कमजोर पड़ गया है?
CSIS के एक्सपर्ट मार्क कैंसरियन ने चेतावनी दी है कि हथियारों की इस कमी से अमेरिका के लिए बड़ा जोखिम पैदा हो गया है. उनका कहना है कि अगर भविष्य में चीन के साथ कोई टकराव होता है, तो अमेरिका के पास पर्याप्त मिसाइलें नहीं होंगी. इन हथियारों के स्टॉक को फिर से भरने में एक से चार साल का समय लगेगा और उसे पुराने स्तर पर लाने में कई साल और लग सकते हैं.
दक्षिण कोरिया में तैनात THAAD सिस्टम के बारे में जनरल जेवियर ब्रूनसन ने बताया है कि सिस्टम तो वहीं रहेंगे, लेकिन उनके मिसाइल म्यूनिशन्स को अब मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है.