ईरान के साथ जारी युद्ध के चलते अमेरिका के पास मौजूद हथियारों का बड़ा हिस्सा खर्च हो चुका है। पेंटागन के पूर्व अधिकारी Mark Cancian ने बताया कि पिछले कुछ महीनों की लड़ाई में अमेरिका ने अपने महत्वपूर्ण हथियारों का एक तिहाई से लेकर आधा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है। 24 जुलाई 2026 तक अमेरिका को लगातार 13वें दिन ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी है, जिससे आने वाले समय में अन्य देशों के साथ संभावित तनाव के लिए हथियारों की कमी का खतरा पैदा हो गया है।

हथियारों की कमी और संभावित खतरा

एक रिपोर्ट के मुताबिक, अभी की स्थिति के लिए तो हथियार काफी हैं लेकिन भविष्य के लिए यह चिंता की बात है। विशेष रूप से Tomahawk क्रूज मिसाइल और PatriotTHAAD इंटरसेप्टर के स्टॉक पर असर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में, विशेषकर चीन के साथ किसी भी भविष्य के विवाद के समय अमेरिका कमजोर पड़ सकता है।

बढ़ता अंतरराष्ट्रीय तनाव

युद्ध की स्थिति अब काफी गंभीर हो गई है। राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ और सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं, जबकि विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा है कि ईरान को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है। इस संघर्ष में अब तक 18 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है। क्षेत्र में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि Brent crude तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं, जिसका सीधा असर तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। कुवैत ने भी अपने क्षेत्र में ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने का प्रयास किया है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.