ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी का आदेश दिया और चेतावनी दी कि वहां आने-जाने वाले जहाजों को डुबो दिया जाएगा। इस बड़े कदम के बाद चीन ने अमेरिका की कड़ी निंदा की है और इसे पूरी दुनिया के लिए खतरनाक बताया है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि यह मामला कहां तक जाता है।

अमेरिका ने क्या कदम उठाया और ट्रंप ने क्या चेतावनी दी

अमेरिकी सेना ने 13 अप्रैल 2026 को ईरान के सभी बंदरगाहों और तटीय इलाकों की घेराबंदी शुरू कर दी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि अगर कोई ईरानी हमलावर नाव इस घेराबंदी के पास आएगी, तो उसे तुरंत खत्म कर दिया जाएगा। US Central Command ने बताया कि यह नियम उन सभी देशों के जहाजों पर लागू होगा जो ईरान के बंदरगाहों में जा रहे हैं या वहां से बाहर निकल रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि उसने ईरान के सामने अपनी शर्तें साफ कर दी हैं।

चीन और अन्य देशों ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी

चीन ने इस कार्रवाई को खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना बताया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि इससे तनाव और बढ़ेगा और मौजूदा युद्धविराम टूट सकता है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बिखर रही है और दुनिया जंगल राज की तरफ नहीं जा सकती। वहीं, पाकिस्तान ने इस मामले में दोबारा बातचीत की कोशिश की है, जबकि ईरान ने कहा है कि वह किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेगा।

तेल बाजार और आम लोगों पर क्या होगा असर

इस तनाव की वजह से समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ गया है, जिससे तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने बताया कि कच्चे तेल की मांग में भारी गिरावट आ सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं। संयुक्त राष्ट्र और कतर ने दोनों देशों से अपील की है कि समुद्री रास्तों को दबाव का जरिया न बनाया जाए। फ्रांस ने भी जहाजों की आवाजाही बहाल करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन तैयार करने का ऐलान किया है।

Sushma Kumari

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