अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोमवार, 13 जुलाई 2026 को ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी बहाल करने की घोषणा की है। यह आदेश 14 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा। इस फैसले के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ता तनाव मुख्य कारण है। अमेरिकी प्रशासन ने खुद को इस क्षेत्र का रक्षक बताते हुए होर्मुज से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर 20 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी सैन्य बलों ने लगातार दूसरे दिन ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं। CENTCOM की रिपोर्ट के अनुसार, 12 जुलाई को ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार साइटों और मिसाइल क्षमताओं को निशाना बनाया गया। इस अभियान के लिए अमेरिका ने क्षेत्र में कम से कम 19 युद्धपोत तैनात किए हैं, जिनमें दो विमानवाहक पोत और 13 विध्वंसक जहाज शामिल हैं।
ईरान और खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया
ईरान के सैन्य मुख्यालय Khatam al-Anbiya ने चेतावनी दी है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन में किसी भी अमेरिकी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेंगे। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उन्होंने 13 जुलाई को जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है और ओमान में रडार सिस्टम को नष्ट किया है। इस दौरान जॉर्डन की सेना ने ईरान से आई चार मिसाइलें मार गिराने की पुष्टि की है, जबकि बहरीन और कुवैत में भी हवाई सुरक्षा सायरन बजने की खबरें हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव Antonio Guterres ने इस गंभीर तनाव पर अपनी गहरी चिंता जताई है।
