US का ईरान पर समुद्री नाकाबंदी का बड़ा एक्शन, अमेरिकी एक्सपर्ट ने कहा यह अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ नाम से एक बड़ी समुद्री मुहिम शुरू की है। इसके तहत अमेरिकी नौसेना ने ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी है ताकि वहां का समुद्री व्यापार पूरी तरह रुक जाए। इस कार्रवाई के बाद अब दुनिया भर के कानूनी एक्सपर्ट्स के बीच इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के हिसाब से सही है या गलत।
अमेरिका ने नाकाबंदी के लिए क्या कदम उठाए?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने साफ कर दिया है कि उन्होंने ईरान के बंदरगाहों पर आने और जाने वाले सभी समुद्री रास्तों को बंद कर दिया है। 13 अप्रैल 2026 को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में यह नाकाबंदी लागू की गई। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे उन सभी जहाजों को पकड़ेंगे जो ईरान की मदद कर रहे हैं या वहां से तेल ले जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक करीब 23 जहाजों को बंदरगाहों से वापस भेज दिया गया है।
इस नाकाबंदी पर कानूनी विवाद क्या है?
ईरान का कहना है कि अमेरिका की यह हरकत उसके देश के अधिकारों का उल्लंघन है और इसे एक हमला माना जाना चाहिए। वहीं, कानूनी जानकारों की राय अलग-अलग है। जेम्स क्रास्का जैसे एक्सपर्ट्स का मानना है कि युद्ध जैसी स्थिति में नाकाबंदी करना कानूनी तौर पर सही है। लेकिन डेल कांतो चैंबर्स के कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के नियमों का बड़ा उल्लंघन है, क्योंकि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय रास्ता है जहाँ जहाजों के आने-जाने का हक सबको है।
नाकाबंदी से जुड़ी मुख्य तारीखें और घटनाएँ
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 12 अप्रैल 2026 | US ने नाकाबंदी का ऐलान किया |
| 13 अप्रैल 2026 | हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नाकाबंदी शुरू हुई |
| 14 अप्रैल 2026 | ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) को शिकायत भेजी |
| 16 अप्रैल 2026 | नाकाबंदी पूरी तरह लागू हुई और व्यापार रुका |
| 18 अप्रैल 2026 | ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी |
| 19 अप्रैल 2026 | ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ ग्लोबल कैंपेन शुरू हुआ |