मिडिल ईस्ट में तनाव बहुत बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान के सभी बंदरगाहों की समुद्री घेराबंदी शुरू कर दी है। इस मिशन के लिए अमेरिका ने इलाके में 16 युद्धपोत तैनात किए हैं। यह 2003 के इराक हमले के बाद सबसे बड़ी सैन्य तैनाती है।

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अमेरिका की इस घेराबंदी में क्या खास है?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि 13 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे से ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू हो गई। यह नियम उन सभी जहाजों पर लागू होगा जो ईरान के बंदरगाहों में जा रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं। हालांकि, जो जहाज सिर्फ होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे हैं और ईरान नहीं जा रहे, उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी। अमेरिका ने इस मिशन के लिए बड़े स्तर पर तैयारी की थी।

जहाजों के प्रकार संख्या
एयरक्राफ्ट कैरियर (USS Abraham Lincoln) 1
डिस्ट्रॉयर (Destroyers) 11
एम्फिबियस असॉल्ट शिप 3
लिटोरल कॉम्बैट शिप 1

ईरान और दुनिया के देशों की क्या प्रतिक्रिया है?

ईरान ने अमेरिका के इस कदम को गैरकानूनी और समुद्री डकैती बताया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि अगर कोई भी सैन्य जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पास आया, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। उनका कहना है कि यह इलाका उनके नियंत्रण में है।

दूसरी तरफ, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने साफ कर दिया है कि ब्रिटेन इस घेराबंदी को लागू नहीं करेगा, हालांकि उनके माइनस्वीपर जहाज वहां तैनात रहेंगे। चीन ने भी संकेत दिया है कि वह ईरान के साथ अपने व्यापार और ऊर्जा समझौतों का सम्मान करना जारी रखेगा।