अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब चरम पर पहुँच गया है. अमेरिका ने ईरान पर शांति समझौते के लिए दबाव बनाने के लिए उसकी समुद्री सीमा की घेराबंदी कर दी है. इस कदम से ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है और पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है. जानकारों का मानना है कि इस विवाद से एशिया के देशों में ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है.

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का पूरा घटनाक्रम

इस विवाद की शुरुआत अप्रैल महीने में हुई. 13 अप्रैल 2026 को अमेरिका ने Strait of Hormuz की घेराबंदी शुरू की और 15 अप्रैल तक ईरान का समुद्री व्यापार पूरी तरह बंद कर दिया. इसके जवाब में 18 अप्रैल को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने भी इस समुद्री रास्ते को बंद करने का ऐलान किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जब तक ईरान के साथ पूरा शांति समझौता नहीं हो जाता, यह घेराबंदी जारी रहेगी.

जहाज की जब्ती और बुनियादी ढांचे को तबाह करने की धमकी

तनाव तब और बढ़ गया जब 19 अप्रैल को अमेरिका ने ईरान के एक कार्गो जहाज ‘Touska’ को जब्त कर लिया. ईरान ने इसे समुद्री डकैती करार दिया और अमेरिका के साथ किसी भी नई बातचीत को खारिज कर दिया. इसके बाद 20 अप्रैल को डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ी चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो वह ईरान के हर पावर प्लांट और हर पुल को तबाह कर देंगे.

दुनिया और एशिया के देशों पर होने वाला असर

  • तेल की सप्लाई: घेराबंदी की वजह से ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है.
  • एशिया की चिंता: विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इससे एशिया के देशों में तेल और ऊर्जा की कमी हो सकती है.
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दोनों देशों द्वारा रास्ता रोकने को एक बड़ी गलती बताया.
  • रूस और चीन: रूस ने युद्धविराम बढ़ाने की मांग की है, जबकि चीन ने जहाज की जब्ती पर चिंता जताई है.
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.