अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी की, 10 हजार सैनिकों के साथ लगाया पहरा, व्यापार पूरी तरह ठप
अमेरिका ने ईरान के समुद्री रास्तों और बंदरगाहों को पूरी तरह घेर लिया है. जनरल Dan Caine ने जानकारी दी कि इस नाकाबंदी को लागू करने के लिए 10 हजार से ज्यादा अमेरिकी नाविक, मरीन और एयरमेन तैनात किए गए हैं. इस बड़े एक्शन से ईरान का समुद्री व्यापार एकदम रुक गया है और दुनिया भर की नजरें अब इस तनाव पर हैं.
अमेरिका की इस नाकाबंदी के नियम क्या हैं?
जनरल Dan Caine ने बताया कि यह घेराबंदी सिर्फ ईरान के बंदरगाहों और उसके तटों पर लागू है, न कि पूरे होर्मुज जलडमरूमध्य पर. इस नियम के मुताबिक, दुनिया के किसी भी देश का जहाज अगर ईरान के बंदरगाह की तरफ जा रहा है या वहां से आ रहा है, तो उसे रोका जाएगा. अमेरिकी सेना ने उन ‘डार्क-फ्लीट’ जहाजों को भी निशाने पर लिया है जो चोरी-छिपे ईरान का तेल बाहर भेजते हैं. अमेरिका ने साफ चेतावनी दी है कि जो जहाज बात नहीं मानेंगे, उन पर बल का प्रयोग किया जाएगा.
ईरान को अमेरिका ने क्या चेतावनी दी है?
रक्षा सचिव Pete Hegseth ने कहा कि यह नाकाबंदी बहुत मजबूत है और इसे तब तक जारी रखा जाएगा जब तक जरूरत होगी. उन्होंने ईरान के सैन्य नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका उन पर पैनी नजर रख रहा है. अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि अगर ईरान ने प्रस्तावित डील को ठुकराया, तो युद्ध दोबारा शुरू हो सकता है. इसके अलावा, ‘Operation Economic Fury’ के जरिए ईरान के बैंकिंग सेक्टर और तेल की बिक्री पर बहुत कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे.
नाकाबंदी से जुड़ी मुख्य बातें
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| शुरुआत की तारीख | 13 अप्रैल 2026 |
| कुल तैनात सैनिक | 10,000 से ज्यादा |
| अमेरिकी जहाज | 12 जहाज और दर्जनों विमान |
| लक्ष्य | ईरान के बंदरगाह और समुद्री तट |
| वापस मुड़े जहाज | अब तक 13 जहाज वापस लौटे |
| मध्यस्थ देश | पाकिस्तान (सेना प्रमुख आसिम मुनीर) |
| आने वाला एक्शन | Operation Economic Fury |
ईरान ने इस कदम को गैरकानूनी और समुद्री डकैती जैसा बताया है. ईरान का कहना है कि इस नाकाबंदी की वजह से मौजूदा युद्धविराम खत्म हो सकता है. वहीं, पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत करवाने की कोशिश कर रहा है ताकि मामला शांत हो सके.