अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू कर दी है। यह बड़ा कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद उठाया गया। इस कार्रवाई का मकसद ईरान के समुद्री व्यापार को रोकना है, जिससे अब पूरी दुनिया की नजरें इस तनाव पर टिकी हैं।

अमेरिका की इस घेराबंदी के नियम क्या हैं?

  • यह नाकाबंदी उन सभी जहाजों पर लागू है जो ईरान के बंदरगाहों में जा रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं।
  • अमेरिकी सेना ने कहा है कि जो जहाज ईरान के अलावा दूसरे देशों के बंदरगाहों की तरफ जा रहे हैं, उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी।
  • घेराबंदी मुख्य रूप से ओमान की खाड़ी और अरब सागर में की गई है ताकि जहाज़ों को पकड़ने में आसानी हो।
  • खाना और दवाइयों जैसे जरूरी मानवीय सामान ले जाने वाले जहाजों को जांच के बाद जाने की अनुमति दी जाएगी।

अब तक क्या असर हुआ और ईरान का क्या जवाब है?

CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि 36 से 48 घंटों के भीतर ईरान का समुद्री व्यापार पूरी तरह रुक गया। अमेरिकी नौसेना ने कई जहाजों को वापस ईरान के बंदरगाहों की ओर भेज दिया है। हालांकि, ईरान और कुछ शिपिंग कंपनियों का दावा है कि कुछ जहाज अभी भी वहां पहुंच रहे हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर यह घेराबंदी जारी रही, तो वह फारस की खाड़ी और लाल सागर के रास्तों को पूरी तरह बंद कर देगा।

घेराबंदी में कितनी सैन्य ताकत लगाई गई है?

विवरण संख्या/जानकारी
कुल युद्धपोत एक दर्जन से ज्यादा
कुल सैनिक लगभग 10,000 (नाविक, मरीन और एयरमेन)
उपकरण गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और मानव रहित विमान

आम आदमी और ग्लोबल मार्केट पर क्या होगा असर?

IMF ने चेतावनी दी है कि अगर यह विवाद और बढ़ा, तो पूरी दुनिया में मंदी आ सकती है। तेल की सप्लाई रुकने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ बातचीत का दूसरा दौर शुरू हो सकता है और यह लड़ाई जल्द खत्म हो जाएगी।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.